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दिल्ली में गौशाला निर्माण को लेकर विवाद, जगृति मिश्रा ने लगाए गंभीर आरोप!
दिल्ली में गौशाला निर्माण को लेकर विवाद, जगृति मिश्रा ने लगाए गंभीर आरोप!
दिल्ली में गौशाला निर्माण को लेकर विवाद, जगृति मिश्रा ने लगाए गंभीर आरोप!
दिल्ली में स्ट्रीट वर्ल्ड ट्रस्ट (Street World Trust) की ओर से बेसहारा और दिव्यांग पशुओं के लिए बनाई जा रही गौशाला को लेकर विवाद सामने आया है।
📍 क्या है पूरा मामला?
जगृति मिश्रा, जो पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था चलाती हैं, का आरोप है कि वह करीब 70 लाख रुपये की लागत से पशु आश्रय स्थल बना रही थीं। इसी दौरान निर्माणाधीन गौशाला को कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना के तोड़ दिया गया।
जगृति मिश्रा ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पार्षद को रिश्वत देने से इनकार करने के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई में एमसीडी के #अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी थी।
⚖️ अब उठ रहे हैं सवाल अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। पूरे #घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण हटाने की कार्रवाई किन नियमों के तहत की गई।
🐄 बेसहारा पशुओं की सेवा करने वालों को न्याय मिलना चाहिए।
फिलहाल, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है
दिल्ली में स्ट्रीट वर्ल्ड ट्रस्ट (Street World Trust) की ओर से बेसहारा और दिव्यांग पशुओं के लिए बनाई जा रही गौशाला को लेकर विवाद सामने आया है।
📍 क्या है पूरा मामला?
जगृति मिश्रा, जो पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था चलाती हैं, का आरोप है कि वह करीब 70 लाख रुपये की लागत से पशु आश्रय स्थल बना रही थीं। इसी दौरान निर्माणाधीन गौशाला को कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना के तोड़ दिया गया।
जगृति मिश्रा ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पार्षद को रिश्वत देने से इनकार करने के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई में एमसीडी के #अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी थी।
⚖️ अब उठ रहे हैं सवाल अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। पूरे #घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण हटाने की कार्रवाई किन नियमों के तहत की गई।
🐄 बेसहारा पशुओं की सेवा करने वालों को न्याय मिलना चाहिए।
फिलहाल, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है