ऑटोमोबाइल
दिल्ली कैबिनेट की ‘दुर्गा’ ई-ऑटो योजना को मंजूरी, पहले चरण में 1,300 पिंक ई-ऑटो
स्वरोजगार के साथ सुरक्षित और स्वच्छ परिवहन को मिलेगा बढ़ावा, ऑनलाइन पोर्टल से लिए जाएंगे आवेदन
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय को स्वरोजगार से जोड़ने तथा राजधानी में सुरक्षित एवं स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘दुर्गा’ ई-ऑटो योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। योजना के पहले चरण में कुल 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो आवंटित किए जाएंगे। इनमें 1,170 ई-ऑटो महिलाओं तथा 130 ई-ऑटो ट्रांसजेंडर लाभार्थियों के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक राजस्व जिले में अधिकतम 90 ई-ऑटो महिलाओं और 10 ट्रांसजेंडर लाभार्थियों को दिए जाने का प्रावधान है।
सरकार के अनुसार, योजना के तहत लाभार्थी इलेक्ट्रिक ऑटो के मालिक और चालक बनकर सम्मानजनक स्वरोजगार और आजीविका प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, यह पहल महिलाओं की परिवहन क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने तथा स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। योजना के लिए आवेदन एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला आवेदकों के लिए 20 से 40 वर्ष की आयु, दिल्ली निवासी होना, वैध वोटर आईडी, LMV ड्राइविंग लाइसेंस और PSV बैज जैसी पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। ‘दुर्गा’ योजना को दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तथा सुरक्षित और हरित परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के अनुसार, योजना के तहत लाभार्थी इलेक्ट्रिक ऑटो के मालिक और चालक बनकर सम्मानजनक स्वरोजगार और आजीविका प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, यह पहल महिलाओं की परिवहन क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने तथा स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। योजना के लिए आवेदन एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला आवेदकों के लिए 20 से 40 वर्ष की आयु, दिल्ली निवासी होना, वैध वोटर आईडी, LMV ड्राइविंग लाइसेंस और PSV बैज जैसी पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। ‘दुर्गा’ योजना को दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तथा सुरक्षित और हरित परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।