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08 अग. 2026
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कृषि

दुल्हिन बाजार में धान की फसल पर मंडराया संकट

✍️ रिपोर्टर: Ankit Raj 🗓 07 अग. 2026, 03:48 PM 👁 26
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नहरों में पानी नहीं, सरकारी बोरिंग भी बेअसर

दुल्हिन बाजार प्रखंड के हरपुरा मोकिमपुर, महुआबाग, सोरमपुर समेत आसपास के कई गांवों में नहरी क्षेत्र के समीप होने के बावजूद धान की खेती करने वाले किसानों को सिंचाई के लिए जूझना पड़ रहा है। नहरों में पानी नहीं आने से खेतों में लगी धान की फसल प्रभावित हो रही है। बारिश नहीं होने और सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

किसान कमल किशोर शर्मा का कहना है कि धान की रोपाई के बाद फसल को नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन नहरों में पानी का प्रवाह नहीं होने से खेतों की मिट्टी सूखने लगी है। कई खेतों में जगह-जगह दरारें उभर आई हैं। धान के पौधे भी सिंचाई के अभाव में मुरझाने लगे हैं। ऐसी स्थिति में अब किसानों की उम्मीदें पूरी तरह मानसून की बारिश पर टिकी हुई हैं। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि जल्द बारिश हो, ताकि किसी तरह फसल बचाई जा सके और खेती में लगी लागत निकल सके।

दूसरी ओर खेतों की सिंचाई के लिए सरकार की ओर से लगाए गए सरकारी बोरिंग भी किसानों के लिए पर्याप्त सहारा नहीं बन पा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई बोरिंग लगातार दिन-रात चलने के कारण जलस्तर में भारी गिरावट आ गई है। बधार में लगे कई सरकारी बोरिंग अब पूरी तरह फेल हो चुके हैं। इससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट और गहरा गया है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि सिंचाई और अन्य जरूरी संसाधनों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। कई किसान खेती से लागत निकालना भी मुश्किल बता रहे हैं। आर्थिक परेशानी से जूझ रहे कुछ किसान अब खेती का आश्रय छोड़कर रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर रुख करने लगे हैं।

ग्रामीण अजीत कुमार ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संबंधित विभाग को ठोस पहल करनी चाहिए। किसानों को समय पर नहर का पानी, चालू बोरिंग और सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसानों ने सरकार से तत्काल सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और धान की फसल बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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