📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Electronics & IT, Government of India
राजनीति
तेलंगाना CM केटीआर ने राहुल गांधी को ‘वोट चोर’ का समर्थन करने का आरोप, कांग्रेस का विरोध
✍️ India Today
🗓 08 अक्टू. 2026, 03:17 PM
👁 16
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.टी.रामा राव ने कहा कि राहुल गांधी "वोट चोर" का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने मत-चोरी का विरोध किया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.टी.रामा राव ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी को "वोट चोर" का समर्थन करने का आरोप लगाया। यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित मत-चोरी विरोध प्रदर्शनों के बीच आई।
कांग्रेस ने हालिया चुनावों में व्यापक मत-धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एक रैली आयोजित की, जिसमें मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के कड़ाई से पालन की मांग की गई। पार्टी ने किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया, परन्तु चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
हैदराबाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों के आधार पर राहुल गांधी को मत-चोरी से जोड़ा गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से शीघ्र कार्रवाई करने और इस प्रकार के आरोपों से लोकतंत्र में भरोसा घटने से बचने का आग्रह किया।
अभी तक चुनाव आयोग ने इन विशिष्ट आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी अवधि में मत-इमानदारी को लेकर राजनीतिक शब्दजाल बढ़ जाता है और आगामी राज्य चुनावों से पहले दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर बहस जारी रहेगी।
अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, और यह मामला राजनीतिक बहस की सीमा में ही बना हुआ है।
कांग्रेस ने हालिया चुनावों में व्यापक मत-धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एक रैली आयोजित की, जिसमें मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के कड़ाई से पालन की मांग की गई। पार्टी ने किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया, परन्तु चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
हैदराबाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों के आधार पर राहुल गांधी को मत-चोरी से जोड़ा गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से शीघ्र कार्रवाई करने और इस प्रकार के आरोपों से लोकतंत्र में भरोसा घटने से बचने का आग्रह किया।
अभी तक चुनाव आयोग ने इन विशिष्ट आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी अवधि में मत-इमानदारी को लेकर राजनीतिक शब्दजाल बढ़ जाता है और आगामी राज्य चुनावों से पहले दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर बहस जारी रहेगी।
अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, और यह मामला राजनीतिक बहस की सीमा में ही बना हुआ है।