📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sanket Oswal
शिक्षा
तेजस्वी यादव ने कहा: बिहार में हजारों नियोजित शिक्षकों की सेवा पर संकट, सरकार से त्वरित कार्रवाई चाहिए
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 18 अक्टू. 2026, 09:45 AM
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बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को हजारों नियोजित शिक्षकों की सेवा संकट को सुलझाने का आग्रह किया।
तेजस्वी यादव, राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता, बिहार विधान परिषद चुनाव में सक्रिय प्रचार से हटकर नियोजित शिक्षकों की सेवा संकट को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लिखे पत्र में बताया कि हजारों शिक्षकों को स्थायी पद नहीं मिलने से शिक्षा प्रणाली में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।
पत्र में विशेष रूप से उन शिक्षकों की तत्काल नियमितीकरण की मांग की गई है, जिन्हें नियुक्त किया गया है पर अभी भी अनुबंध या अस्थायी पदों पर रखा गया है। यादव का कहना है कि इस देरी से न केवल शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
बिहार में इस प्रकार की शिक्षक सेवा की पेंडिंग समस्या कई सालों से चलती आ रही है, जहाँ कई शिक्षकों को स्थायी पद और संबंधित लाभों का इंतजार है। इस अनसुलझे मुद्दे के कारण हड़ताल, अनुपस्थिति और कार्यस्थल पर असंतोष बढ़ा है।
अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पत्र का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। चुनाव से पहले इस मांग का समय चुनना, ruling party पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव का यह कदम वास्तविक जन समस्या को उठाकर मतदाता समर्थन को मजबूत करने और चुनाव से पहले सरकार को कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।
पत्र में विशेष रूप से उन शिक्षकों की तत्काल नियमितीकरण की मांग की गई है, जिन्हें नियुक्त किया गया है पर अभी भी अनुबंध या अस्थायी पदों पर रखा गया है। यादव का कहना है कि इस देरी से न केवल शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
बिहार में इस प्रकार की शिक्षक सेवा की पेंडिंग समस्या कई सालों से चलती आ रही है, जहाँ कई शिक्षकों को स्थायी पद और संबंधित लाभों का इंतजार है। इस अनसुलझे मुद्दे के कारण हड़ताल, अनुपस्थिति और कार्यस्थल पर असंतोष बढ़ा है।
अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पत्र का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। चुनाव से पहले इस मांग का समय चुनना, ruling party पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव का यह कदम वास्तविक जन समस्या को उठाकर मतदाता समर्थन को मजबूत करने और चुनाव से पहले सरकार को कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।