📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Information and Public Relations Department, Gover
राजनीति
तेजस्वी यादव की रिहाई, राजद ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण दफ़्तर जाने का आग्रह
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 19 अग. 2026, 02:33 PM
👁 16
तेजस्वी यादव को पटना में संक्षिप्त हिरासत के बाद रिहा किया गया, और राजद ने अपने कार्यकर्ताओं से शांति से दफ़्तर पहुँचने का अनुरोध किया।
पटना पुलिस ने वरिष्ठ राजद नेता तेजस्वी यादव को बुधवार को एक संक्षिप्त हिरासत के बाद रिहा कर दिया, जो एक विरोध मार्च से जुड़ी थी। पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
राजद ने तुरंत एक बयान जारी कर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से पार्टी के मुख्यालय की ओर शांति से पहुँचने का आग्रह किया, यह जताते हुए कि आगे कोई उग्रता सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकती है।
यह शांतिपूर्ण अपील उस उग्र मार्च के बाद आई है, जो जेपी गोलंबर से शुरू होकर डाकबंगला चौराहे तक गया, जहाँ पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए बैरिकेड लगाई थी। प्रदर्शनकारियों ने कागज़ लीक, बेरोज़गारी और छात्र मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की, जिससे अस्थायी रूप से हलचल पैदा हुई।
प्राधिकरण ने कहा है कि वे भीड़ पर नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि मार्च फिर से हिंसक न हो, जबकि राजद के नेताओं ने वैध, अहिंसात्मक विरोध के महत्व पर बल दिया है।
यह घटना बिहार में बढ़ती राजनीतिक तनाव को उजागर करती है, जहाँ पार्टियां सामाजिक‑आर्थिक मुद्दों को लेकर आगामी चुनावी माहौल में संवेदनशीलता से काम ले रही हैं।
राजद ने तुरंत एक बयान जारी कर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से पार्टी के मुख्यालय की ओर शांति से पहुँचने का आग्रह किया, यह जताते हुए कि आगे कोई उग्रता सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकती है।
यह शांतिपूर्ण अपील उस उग्र मार्च के बाद आई है, जो जेपी गोलंबर से शुरू होकर डाकबंगला चौराहे तक गया, जहाँ पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए बैरिकेड लगाई थी। प्रदर्शनकारियों ने कागज़ लीक, बेरोज़गारी और छात्र मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की, जिससे अस्थायी रूप से हलचल पैदा हुई।
प्राधिकरण ने कहा है कि वे भीड़ पर नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि मार्च फिर से हिंसक न हो, जबकि राजद के नेताओं ने वैध, अहिंसात्मक विरोध के महत्व पर बल दिया है।
यह घटना बिहार में बढ़ती राजनीतिक तनाव को उजागर करती है, जहाँ पार्टियां सामाजिक‑आर्थिक मुद्दों को लेकर आगामी चुनावी माहौल में संवेदनशीलता से काम ले रही हैं।