📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Carol M. Highsmith
टेक्नोलॉजी
टेक कंपनियों ने नई H‑1B वीज़ा शुल्क वृद्धि को रद्द करने की मांग की
✍️ Hindustan Times
🗓 25 सित. 2026, 10:16 AM
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अमेरिकी टेक कंपनियों ने नई H‑1B वीज़ा शुल्क को हटाने की मांग की, कहती हैं कि यह प्रतिभा भर्ती को नुकसान पहुँचाएगा।
अमेरिकी प्रमुख टेक कंपनियों का एक गठबंधन ने ट्रम्प प्रशासन से नई H‑1B वीज़ा आवेदन शुल्क को रद्द करने का औपचारिक अनुरोध किया है। इस शुल्क की घोषणा इस महीने की शुरुआत में हुई थी, जिससे वीज़ा फ़ाइलिंग की लागत में कई सौ डॉलर की अतिरिक्त राशि जुड़ जाएगी।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यह अतिरिक्त खर्च कुशल कार्यबल को आकर्षित करने और बनाए रखने में बाधा उत्पन्न करेगा, खासकर जब टेक क्षेत्र में श्रम की कमी है। वे चेतावनी देते हैं कि उच्च लागत से प्रतिभा उन देशों की ओर रुख कर सकती है जहाँ इमिग्रेशन नीतियाँ अधिक अनुकूल हैं, जिससे अमेरिकी नवाचार और विकास में गिरावट आ सकती है।
प्रशासन ने अभी तक इस याचिका का जवाब नहीं दिया है, लेकिन अधिकारियों ने बताया है कि यह शुल्क प्रक्रिया लागत को संतुलित करने और इमिग्रेशन प्रवर्तन के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से है। टेक नेताओं का मानना है कि यह कदम अनुपातहीन है और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर सकता है।
यदि यह शुल्क लागू रहता है, तो कंपनियों को नई भर्ती में धीमी गति और उन परियोजनाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है, जिनके लिए H‑1B वीज़ा के माध्यम से लाए गए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यह अतिरिक्त खर्च कुशल कार्यबल को आकर्षित करने और बनाए रखने में बाधा उत्पन्न करेगा, खासकर जब टेक क्षेत्र में श्रम की कमी है। वे चेतावनी देते हैं कि उच्च लागत से प्रतिभा उन देशों की ओर रुख कर सकती है जहाँ इमिग्रेशन नीतियाँ अधिक अनुकूल हैं, जिससे अमेरिकी नवाचार और विकास में गिरावट आ सकती है।
प्रशासन ने अभी तक इस याचिका का जवाब नहीं दिया है, लेकिन अधिकारियों ने बताया है कि यह शुल्क प्रक्रिया लागत को संतुलित करने और इमिग्रेशन प्रवर्तन के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से है। टेक नेताओं का मानना है कि यह कदम अनुपातहीन है और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर सकता है।
यदि यह शुल्क लागू रहता है, तो कंपनियों को नई भर्ती में धीमी गति और उन परियोजनाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है, जिनके लिए H‑1B वीज़ा के माध्यम से लाए गए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।