तारानगर: मरणोपरांत देहदान कर प्रेरणास्रोत बनीं बहन ज्याना देवी इन्सां, परिजनों ने अंतिम इच्छा का किया सम्मान डाबड़ी छोटी निवासी 60 वर्षीय ज्याना देवी इन्सां ने किया देहदान,
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तारानगर (चूरू)। क्षेत्र के डाबड़ी छोटी गांव निवासी 60 वर्षीय ज्याना देवी इन्सां मरणोपरांत देहदान कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गईं। उनकी पत्नी देवीलाल इन्सां ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान करवाया। ज्याना देवी इन्सां के इस निर्णय और परिजनों के सहयोग से समाज में मानवता, सेवा और जनकल्याण का संदेश गया।
जानकारी के अनुसार, ज्याना देवी इन्सां डेरा सच्चा सौदा की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी की सेवादार थीं। उन्होंने गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के वचनों से प्रेरित होकर देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव देह को चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए समर्पित कर दिया। उनका पार्थिव शरीर हरियाणा के झज्जर स्थित मेडिकल कॉलेज में भेजा गया।
परिजनों ने अर्थी को दिया कंधा, बेटी-बेटे की समानता का संदेश
अंतिम विदाई के दौरान उनके पुत्र आत्माराम, पुत्रवधू ममता एवं कमलेश, पौत्र रहमत नसीब और पौत्री रुस्तम ने अर्थी को कंधा दिया। इस अवसर पर परिजनों ने ‘बेटा-बेटी एक समान’ का संदेश भी दिया। परिवार के इस कदम की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
सेवादारों और ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
ज्याना देवी इन्सां की अंतिम विदाई के दौरान डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ‘बहन ज्याना देवी अमर रहें’ के नारे लगाए गए। कार्यक्रम में प्रभुदयाल, किशन, सांवरमल, मनीराम सहित सैकड़ों सेवादार एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
ज्याना देवी इन्सां का मरणोपरांत देहदान समाज में सेवा, त्याग और मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम है। उनका यह निर्णय दूसरों को भी देहदान के प्रति जागरूक होने और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
जानकारी के अनुसार, ज्याना देवी इन्सां डेरा सच्चा सौदा की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी की सेवादार थीं। उन्होंने गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के वचनों से प्रेरित होकर देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव देह को चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए समर्पित कर दिया। उनका पार्थिव शरीर हरियाणा के झज्जर स्थित मेडिकल कॉलेज में भेजा गया।
परिजनों ने अर्थी को दिया कंधा, बेटी-बेटे की समानता का संदेश
अंतिम विदाई के दौरान उनके पुत्र आत्माराम, पुत्रवधू ममता एवं कमलेश, पौत्र रहमत नसीब और पौत्री रुस्तम ने अर्थी को कंधा दिया। इस अवसर पर परिजनों ने ‘बेटा-बेटी एक समान’ का संदेश भी दिया। परिवार के इस कदम की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
सेवादारों और ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
ज्याना देवी इन्सां की अंतिम विदाई के दौरान डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ‘बहन ज्याना देवी अमर रहें’ के नारे लगाए गए। कार्यक्रम में प्रभुदयाल, किशन, सांवरमल, मनीराम सहित सैकड़ों सेवादार एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
ज्याना देवी इन्सां का मरणोपरांत देहदान समाज में सेवा, त्याग और मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम है। उनका यह निर्णय दूसरों को भी देहदान के प्रति जागरूक होने और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।