📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
शिक्षा
टामिलनाडु में कॉलेजों में जनजातीय लिंग समानता सबसे कम, AISHE ने बताया
✍️ The New Indian Express
🗓 23 अग. 2026, 02:33 PM
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ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के अनुसार, टामिलनाडु में कॉलेजों में जनजातीय छात्रों की लिंग समानता भारत में सबसे कम है।
ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के नवीनतम डेटा से पता चलता है कि टामिलनाडु में कॉलेजों में जनजातीय छात्रों की लिंग समानता सभी राज्यों में सबसे कम है। यह सर्वेक्षण देश भर के छात्र जनसांख्यिकी पर जानकारी एकत्र करता है और दिखाता है कि टामिलनाडु के उच्च शिक्षा संस्थानों में महिला जनजातीय छात्रों का अनुपात राष्ट्रीय स्तर पर सबसे कम है। शिक्षा अधिकारियों ने इस असमानता को समावेशी विकास के लिए चिंता का विषय बताया और जनजातीय महिलाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष उपायों की मांग की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने इस तथ्य को रिपोर्ट किया, यह बताते हुए कि राज्य की कुल प्रवेश संख्या मजबूत है, परन्तु जनजातीय वर्ग में लिंग अंतर बना हुआ है। नीति निर्माताओं को इस अंतर को कम करने हेतु नीतियों की समीक्षा करने की अपेक्षा है।
AISHE रिपोर्ट वार्षिक रूप से जारी की जाती है और यह नीति निर्माताओं तथा शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक प्रमुख संदर्भ बनती है। टामिलनाडु ने उच्च शिक्षा बुनियादी ढाँचे को विस्तारित करने में प्रगति की है, परन्तु जनजातीय महिलाओं के लिए लिंग समानता का मुद्दा सामाजिक‑आर्थिक बाधाओं को दर्शाता है, जो उनके प्रवेश और पूर्णता दर को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार, NGOs और कॉलेज प्रशासन के बीच सहयोगी प्रयास इस अंतर को पाटने में मदद कर सकते हैं। भविष्य के AISHE डेटा की निगरानी करके राज्य द्वारा लागू किए गए सुधारात्मक कदमों की प्रभावशीलता को मापा जा सकेगा।
AISHE रिपोर्ट वार्षिक रूप से जारी की जाती है और यह नीति निर्माताओं तथा शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक प्रमुख संदर्भ बनती है। टामिलनाडु ने उच्च शिक्षा बुनियादी ढाँचे को विस्तारित करने में प्रगति की है, परन्तु जनजातीय महिलाओं के लिए लिंग समानता का मुद्दा सामाजिक‑आर्थिक बाधाओं को दर्शाता है, जो उनके प्रवेश और पूर्णता दर को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार, NGOs और कॉलेज प्रशासन के बीच सहयोगी प्रयास इस अंतर को पाटने में मदद कर सकते हैं। भविष्य के AISHE डेटा की निगरानी करके राज्य द्वारा लागू किए गए सुधारात्मक कदमों की प्रभावशीलता को मापा जा सकेगा।