📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
तमिलनाडु के सीएम विजय ने पेरियार नॉलेज वर्ल्ड पुस्तक खरीद में डीएमके के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया
✍️ The New Indian Express
🗓 07 नव. 2026, 03:16 AM
👁 19
मुख्यमंत्री विजय ने पेरियार नॉलेज वर्ल्ड परियोजना के लिए पुस्तकों की खरीद में डीएमके के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में पेरियार नॉलेज वर्ल्ड पहल के तहत पुस्तकों की खरीद में ड्रमक (DMK) के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। यह आरोप एक प्रेस ब्रीफ़िंग में दिया गया, जहाँ उन्होंने अनुबंध से जुड़ी प्रक्रियात्मक चूक और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया।
पेरियार नॉलेज वर्ल्ड, जो क्षेत्रीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए राज्य द्वारा चलाया गया शैक्षिक कार्यक्रम है, ने इस महीने बड़ी मात्रा में पुस्तकों की खरीद की घोषणा की थी। अधिकारियों ने बताया कि निविदा प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए थी, पर मुख्यमंत्री का कहना है कि ड्रमक‑नेतृत्व वाली सरकार ने मानक जांच को नजरअंदाज कर लागत में वृद्धि की।
ड्रमक ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर पार्टी के प्रवक्ता आने वाले दिनों में इन आरोपों को संबोधित करेंगे। विजय ने कहा कि राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी द्वारा एक जांच शुरू की जाएगी, जिससे आरोपों की सत्यता सिद्ध हो सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आरोप राज्य की गठबंधन पार्टियों के बीच मौजूदा तनाव को बढ़ा सकता है, जिससे आगामी विधायी एजेंडा और अगले चुनावी दौर में सार्वजनिक धारणा पर असर पड़ सकता है।
पेरियार नॉलेज वर्ल्ड, जो क्षेत्रीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए राज्य द्वारा चलाया गया शैक्षिक कार्यक्रम है, ने इस महीने बड़ी मात्रा में पुस्तकों की खरीद की घोषणा की थी। अधिकारियों ने बताया कि निविदा प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए थी, पर मुख्यमंत्री का कहना है कि ड्रमक‑नेतृत्व वाली सरकार ने मानक जांच को नजरअंदाज कर लागत में वृद्धि की।
ड्रमक ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर पार्टी के प्रवक्ता आने वाले दिनों में इन आरोपों को संबोधित करेंगे। विजय ने कहा कि राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी द्वारा एक जांच शुरू की जाएगी, जिससे आरोपों की सत्यता सिद्ध हो सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आरोप राज्य की गठबंधन पार्टियों के बीच मौजूदा तनाव को बढ़ा सकता है, जिससे आगामी विधायी एजेंडा और अगले चुनावी दौर में सार्वजनिक धारणा पर असर पड़ सकता है।