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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश के बेटों की आय पुनर्मूल्यांकन आदेश को बरकरार रखा
✍️ TOI India
🗓 02 नव. 2026, 07:38 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को मान्य किया, जिससे आयकर विभाग को पूर्व मुख्य न्यायाधीश के दो बेटों की आय पर पुनः जांच करने की अनुमति मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को मान्य किया, जिससे आयकर विभाग को पूर्व मुख्य न्यायाधीश के दो बेटों की आय पर पुनः मूल्यांकन करने की अनुमति मिली। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि जब असंगतियों के संकेत हों, तो कर प्राधिकरण को पिछले रिटर्न की पुनः जाँच करने का अधिकार है, चाहे मामला कितना भी प्रमुख क्यों न हो।
हाई कोर्ट ने पहले आयकर विभाग को नई जांच करने का निर्देश दिया था, क्योंकि यह चिंतित था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के बच्चों द्वारा कर का भुगतान पर्याप्त नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि यह दर्शाती है कि किसी भी व्यक्ति या परिवार को, चाहे उनका पद कुछ भी हो, कर नियमों से मुक्त नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न्यायपालिका के भीतर कर प्रशासन को सुदृढ़ करने के पक्ष में है और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े समान मामलों में मिसाल स्थापित कर सकता है। आयकर विभाग अब अदालत के निर्देशों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
यह मामला न्यायपालिका के अभिजात वर्ग में कर पारदर्शिता के मुद्दे को उजागर करता है, जिससे न्यायाधीशों और उनके परिवारों के वित्तीय खुलासों पर कड़ी निगरानी और स्पष्ट दिशानिर्देशों की मांग बढ़ रही है।
हाई कोर्ट ने पहले आयकर विभाग को नई जांच करने का निर्देश दिया था, क्योंकि यह चिंतित था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के बच्चों द्वारा कर का भुगतान पर्याप्त नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि यह दर्शाती है कि किसी भी व्यक्ति या परिवार को, चाहे उनका पद कुछ भी हो, कर नियमों से मुक्त नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न्यायपालिका के भीतर कर प्रशासन को सुदृढ़ करने के पक्ष में है और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े समान मामलों में मिसाल स्थापित कर सकता है। आयकर विभाग अब अदालत के निर्देशों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
यह मामला न्यायपालिका के अभिजात वर्ग में कर पारदर्शिता के मुद्दे को उजागर करता है, जिससे न्यायाधीशों और उनके परिवारों के वित्तीय खुलासों पर कड़ी निगरानी और स्पष्ट दिशानिर्देशों की मांग बढ़ रही है।