📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
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सुप्रीम कोर्ट ने लिफ्ट दुर्घटना में दोष निर्धारण का बोझ हटाया
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🗓 30 जुल. 2026, 10:40 AM
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सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय में कहा गया कि लिफ्ट दुर्घटना में पीड़ित को पहले दोष का आकलन नहीं करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि लिफ्ट दुर्घटना के मामले में उपभोक्ता को पहले प्रत्येक पक्ष के दोष का आकलन करने की ज़रूरत नहीं है। इस निर्णय के अनुसार, दोष स्थापित करने का बोझ उन पक्षों पर है जो लिफ्ट के रख‑रखाव और सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार हैं।
इस नए निर्देश के तहत, लिफ्ट दुर्घटना के पीड़ित बिना किसी पूर्व दोष मूल्यांकन के दावे दाखिल कर सकते हैं। यह बदलाव कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाता है और प्रभावित परिवारों पर भार कम करता है।
भारत में लिफ्ट दुर्घटनाएँ एक बढ़ती हुई समस्या रही हैं, जहाँ हाल के वर्षों में कई घटनाएँ दर्ज की गई हैं। कोर्ट का यह निर्णय उपभोक्ताओं और सेवा प्रदाताओं दोनों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय लिफ्ट‑संबंधित विवादों का तेज़ी से निपटारा करेगा और लिफ्ट ऑपरेटरों व रख‑रखाव कंपनियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
इस नए निर्देश के तहत, लिफ्ट दुर्घटना के पीड़ित बिना किसी पूर्व दोष मूल्यांकन के दावे दाखिल कर सकते हैं। यह बदलाव कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाता है और प्रभावित परिवारों पर भार कम करता है।
भारत में लिफ्ट दुर्घटनाएँ एक बढ़ती हुई समस्या रही हैं, जहाँ हाल के वर्षों में कई घटनाएँ दर्ज की गई हैं। कोर्ट का यह निर्णय उपभोक्ताओं और सेवा प्रदाताओं दोनों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय लिफ्ट‑संबंधित विवादों का तेज़ी से निपटारा करेगा और लिफ्ट ऑपरेटरों व रख‑रखाव कंपनियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।