📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: हल्द्वानी में पुलिस स्टेशन जलाने वाले भीड़ को UAPA लागू नहीं करना चाहिए
✍️ Business Standard
🗓 31 जुल. 2026, 04:49 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि हल्द्वानी में पुलिस स्टेशन जलाने वाली भीड़ के लिए UAPA लागू नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह निर्णय दिया कि हल्द्वानी, उत्तराखंड में पुलिस स्टेशन को जलाने वाली भीड़ के कार्य के लिए अवैध गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लागू करना उचित नहीं है। कोर्ट ने बताया कि UAPA का उपयोग आतंकवाद और विद्रोह जैसी गंभीर अपराधों के लिए किया जाता है, और इस घटना से ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला।
यह निर्णय हल्द्वानी में एक विरोध के दौरान उत्पन्न हुई हिंसा के संदर्भ में लिया गया, जब एक भीड़ ने पुलिस स्टेशन को आग लगा दी। कोर्ट ने पाया कि यह एक अचानक हुई नागरिक अशांति थी, न कि कोई संगठित आतंकवादी हमला।
मामले के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस. आर. शर्मा ने कहा कि UAPA का प्रयोग केवल तभी होना चाहिए जब कानून स्पष्ट रूप से लागू हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस कानून का दुरुपयोग नागरिक स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है।
यह फैसला भविष्य में इसी तरह की घटनाओं पर अधिकारियों के दृष्टिकोण को प्रभावित करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि UAPA की कड़ी प्रावधानें केवल तभी लागू हों जब तथ्यों द्वारा समर्थित हों।
यह निर्णय हल्द्वानी में एक विरोध के दौरान उत्पन्न हुई हिंसा के संदर्भ में लिया गया, जब एक भीड़ ने पुलिस स्टेशन को आग लगा दी। कोर्ट ने पाया कि यह एक अचानक हुई नागरिक अशांति थी, न कि कोई संगठित आतंकवादी हमला।
मामले के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस. आर. शर्मा ने कहा कि UAPA का प्रयोग केवल तभी होना चाहिए जब कानून स्पष्ट रूप से लागू हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस कानून का दुरुपयोग नागरिक स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है।
यह फैसला भविष्य में इसी तरह की घटनाओं पर अधिकारियों के दृष्टिकोण को प्रभावित करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि UAPA की कड़ी प्रावधानें केवल तभी लागू हों जब तथ्यों द्वारा समर्थित हों।