📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने शिवशंकर शर्मा की एसएलपी खारिज, झारखंड हाईकोर्ट का फैसला बरकरार, 25,000 रुपये जुर्माना
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 30 अक्टू. 2026, 06:35 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए शिवशंकर शर्मा की एसएलपी खारिज कर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में सरकारी व गैर‑मजुरूआ जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री के मामले में अपना निर्णायक आदेश दिया है। शिवशंकर शर्मा ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी, परंतु न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दी।
झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही यह पाया था कि शर्मा ने ऐसी जमीन का रजिस्ट्री किया है जो उनके नाम पर नहीं है, जिससे भूमि अभिलेखों में धोखाधड़ी का आरोप सिद्ध हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को अस्वीकार कर इस निर्णय की पुष्टि की और कहा कि निचले न्यायालय की सुनवाई सही थी।
इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने शर्मा पर अतिरिक्त 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह दंड सरकारी जमीन की रजिस्ट्री में हेरफेर को रोकने और भविष्य में समान उल्लंघनों से बचाव के लिए दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भूमि अभिलेखों के प्रबंधन में कड़ाई को दर्शाता है और राज्य‑स्वामित्व वाली संपत्तियों के संबंध में क़ानून के प्रवर्तन को सुदृढ़ करेगा।
झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही यह पाया था कि शर्मा ने ऐसी जमीन का रजिस्ट्री किया है जो उनके नाम पर नहीं है, जिससे भूमि अभिलेखों में धोखाधड़ी का आरोप सिद्ध हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को अस्वीकार कर इस निर्णय की पुष्टि की और कहा कि निचले न्यायालय की सुनवाई सही थी।
इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने शर्मा पर अतिरिक्त 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह दंड सरकारी जमीन की रजिस्ट्री में हेरफेर को रोकने और भविष्य में समान उल्लंघनों से बचाव के लिए दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भूमि अभिलेखों के प्रबंधन में कड़ाई को दर्शाता है और राज्य‑स्वामित्व वाली संपत्तियों के संबंध में क़ानून के प्रवर्तन को सुदृढ़ करेगा।