📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली‑हरियाणा पुलिस को अनपहचाने शव के दाह पर जवाब देने का आदेश
✍️ Verdictum
🗓 23 सित. 2026, 12:16 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और हरियाणा पुलिस को एक लापता व्यक्ति के अनपहचाने शव के दाह संबंधी जवाब देने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और हरियाणा पुलिस को एक अनपहचाने शव के दाह संबंधी लिखित जवाब देने का निर्देश जारी किया, जो एक लापता व्यक्ति से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने यह स्पष्टता मांगी है कि शव की पहचान कैसे हुई, दाह से पहले कौन‑से प्रक्रिया अपनाए गए और क्या कानूनी औपचारिकताएँ छूट गईं।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, अनपहचाने शव को दिल्ली के एक दूरस्थ इलाके में पाया गया और औपचारिक जांच के बिना दाह कर दिया गया। लापता व्यक्ति के रिश्तेदारों ने इस पर सवाल उठाए, जिससे सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप कर प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
बेंच ने दोनों राज्य पुलिस को दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है, जिसके बाद आगे की सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि कोई सुधारात्मक कार्रवाई या जांच आवश्यक है या नहीं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से अनपहचाने शवों के निपटारे में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, विशेषकर जब परिवार को उत्तर की तलाश हो।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश भर में समान मामलों के प्रबंधन में एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे अनपहचाने शवों के अंतिम निपटारे से पहले विस्तृत दस्तावेज़ीकरण की महत्ता पर ज़ोर दिया गया है।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, अनपहचाने शव को दिल्ली के एक दूरस्थ इलाके में पाया गया और औपचारिक जांच के बिना दाह कर दिया गया। लापता व्यक्ति के रिश्तेदारों ने इस पर सवाल उठाए, जिससे सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप कर प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
बेंच ने दोनों राज्य पुलिस को दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है, जिसके बाद आगे की सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि कोई सुधारात्मक कार्रवाई या जांच आवश्यक है या नहीं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से अनपहचाने शवों के निपटारे में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, विशेषकर जब परिवार को उत्तर की तलाश हो।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश भर में समान मामलों के प्रबंधन में एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे अनपहचाने शवों के अंतिम निपटारे से पहले विस्तृत दस्तावेज़ीकरण की महत्ता पर ज़ोर दिया गया है।