📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shiraz Husain
देश
सुप्रीम कोर्ट जज ने सीजेआई को लिखा पत्र, राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को हटाने की मांग
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 26 अग. 2026, 03:36 PM
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एक सुप्रीम कोर्ट जज ने सीजेआई को पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पद से हटाने की मांग की, उनके आचरण को लेकर चिंता जताते हुए।
एक सुप्रीम कोर्ट जज ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस को पद से हटाने की मांग की है। इस पत्र में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के आचरण को लेकर जज की चिंताओं को रेखांकित किया गया है और उनके हटाने का अनुरोध किया गया है।
ऐसी मांग भारतीय न्यायिक प्रणाली में असामान्य मानी जाती है और अभी तक मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई के लिए कॉलेजियम द्वारा विस्तृत जांच आवश्यक होती है, क्योंकि वही न्यायाधीशों की नियुक्ति‑स्थानांतरण का प्रबंधन करता है।
हालाँकि आरोपित आचरण के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पर इस पत्र का दाखिला न्यायपालिका के भीतर गंभीर असहमति को दर्शाता है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उच्च न्यायालय के जजों के प्रति चिंताओं को सर्वोच्च स्तर पर कैसे संभाला जाता है, इस पर एक नया मानदंड स्थापित कर सकता है।
इस विकास ने विधि समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, कई वरिष्ठ वकील आगे के कदमों की स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस मुद्दे पर विचार करेगा, न्यायिक जवाबदेही के स्थापित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए।
ऐसी मांग भारतीय न्यायिक प्रणाली में असामान्य मानी जाती है और अभी तक मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई के लिए कॉलेजियम द्वारा विस्तृत जांच आवश्यक होती है, क्योंकि वही न्यायाधीशों की नियुक्ति‑स्थानांतरण का प्रबंधन करता है।
हालाँकि आरोपित आचरण के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पर इस पत्र का दाखिला न्यायपालिका के भीतर गंभीर असहमति को दर्शाता है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उच्च न्यायालय के जजों के प्रति चिंताओं को सर्वोच्च स्तर पर कैसे संभाला जाता है, इस पर एक नया मानदंड स्थापित कर सकता है।
इस विकास ने विधि समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, कई वरिष्ठ वकील आगे के कदमों की स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस मुद्दे पर विचार करेगा, न्यायिक जवाबदेही के स्थापित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए।