📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट में जालंदर केस: पोस्ट‑मैट्रिक छात्रवृत्ति की 21 लाख फीस की प्रतिपूर्ति की मांग
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 01 सित. 2026, 08:50 PM
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जबलपुर में पोस्ट‑मैट्रिक छात्रवृत्ति की पूरी राशि न मिलने का आरोप लगाते हुए, याचिकाकर्ता ने तीन साल की लगभग 21 लाख रुपये की फीस प्रतिपूर्ति की माँग की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार से जवाब देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के जालंदर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पोस्ट‑मैट्रिक छात्रवृत्ति की पूरी राशि न मिलने की शिकायत की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह छात्रवृत्ति शैक्षणिक शुल्क को कवर करने के लिए थी, लेकिन केवल आंशिक रूप से ही वितरित की गई, जिससे तीन शैक्षणिक वर्षों में छात्रों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
दायर दस्तावेज़ में बताया गया है कि कुल कमी लगभग 21 लाख रुपये है, जो उन फीस का प्रतिनिधित्व करता है जो छात्रवृत्ति के बावजूद छात्रों को स्वयं चुकानी पड़ी। याचिकाकर्ता इस राशि की पूरी प्रतिपूर्ति की मांग कर रहा है, यह तर्क देते हुए कि पूरी छात्रवृत्ति न मिलने से लाभार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश राज्य प्रशासन दोनों को इस मामले पर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने शीघ्र स्पष्टीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, यह कहते हुए कि यह छात्रवृत्ति योजना केंद्र‑राज्य सहयोग का परिणाम है और किसी भी चूक से हजारों छात्रों पर असर पड़ सकता है।
यदि कोर्ट प्रतिपूर्ति का आदेश देता है, तो यह देश भर में समान मामलों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पोस्ट‑मैट्रिक छात्रवृत्ति के कार्यान्वयन तंत्र की पुनः समीक्षा और फंड वितरण करने वाले एजेंसियों की जवाबदेही को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
दायर दस्तावेज़ में बताया गया है कि कुल कमी लगभग 21 लाख रुपये है, जो उन फीस का प्रतिनिधित्व करता है जो छात्रवृत्ति के बावजूद छात्रों को स्वयं चुकानी पड़ी। याचिकाकर्ता इस राशि की पूरी प्रतिपूर्ति की मांग कर रहा है, यह तर्क देते हुए कि पूरी छात्रवृत्ति न मिलने से लाभार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश राज्य प्रशासन दोनों को इस मामले पर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने शीघ्र स्पष्टीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, यह कहते हुए कि यह छात्रवृत्ति योजना केंद्र‑राज्य सहयोग का परिणाम है और किसी भी चूक से हजारों छात्रों पर असर पड़ सकता है।
यदि कोर्ट प्रतिपूर्ति का आदेश देता है, तो यह देश भर में समान मामलों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पोस्ट‑मैट्रिक छात्रवृत्ति के कार्यान्वयन तंत्र की पुनः समीक्षा और फंड वितरण करने वाले एजेंसियों की जवाबदेही को सुदृढ़ किया जा सकेगा।