📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट में मिज़ोरम के विवाह‑तलाक कानून को चुनौती
✍️ The Times of India
🗓 25 अग. 2026, 05:33 AM
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मिज़ोरम के विवाह‑तलाक अधिनियम को लैंगिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
मिज़ोरम के विवाह‑तलाक अधिनियम की संवैधानिकता को लेकर एक याचिका भारतीय सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस कानून के कुछ प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं और संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
कानून के विवादित खंड महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग‑अलग शर्तें निर्धारित करते हैं, जिससे यह माना जाता है कि यह नारीवादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। लैंगिक समानता के समर्थक इस बात पर जोर देते हैं कि यह अधिनियम पितृसत्तात्मक मान्यताओं को सुदृढ़ करता है और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के लिए तारीख तय की है, और इसका निर्णय पूरे देश में पारिवारिक कानूनों पर असर डाल सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट इस अधिनियम को असंवैधानिक ठहराता है, तो अन्य राज्यों के समान कानूनों की भी समीक्षा की जा सकती है।
असंतोषजनक प्रावधानों को हटाने या संशोधित करने का आदेश मिलने पर मिज़ोरम सरकार को राष्ट्रीय लैंगिक समानता मानकों के अनुरूप कानून को पुनः तैयार करना पड़ेगा।
कानून के विवादित खंड महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग‑अलग शर्तें निर्धारित करते हैं, जिससे यह माना जाता है कि यह नारीवादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। लैंगिक समानता के समर्थक इस बात पर जोर देते हैं कि यह अधिनियम पितृसत्तात्मक मान्यताओं को सुदृढ़ करता है और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के लिए तारीख तय की है, और इसका निर्णय पूरे देश में पारिवारिक कानूनों पर असर डाल सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट इस अधिनियम को असंवैधानिक ठहराता है, तो अन्य राज्यों के समान कानूनों की भी समीक्षा की जा सकती है।
असंतोषजनक प्रावधानों को हटाने या संशोधित करने का आदेश मिलने पर मिज़ोरम सरकार को राष्ट्रीय लैंगिक समानता मानकों के अनुरूप कानून को पुनः तैयार करना पड़ेगा।