📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-SS क्वालिफाइंग प्रतिशत को 30% तक घटाया, तमिलनाडु में 40 सीटें वापस
✍️ The Hindu
🗓 17 सित. 2026, 09:01 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को NEET-SS क्वालिफाइंग प्रतिशत 30% करने का निर्देश दिया, जिससे तमिलनाडु में 40 खाली सीटें वापस मिलेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि नेशनल एलीजीबिलिटी cum एंट्रेंस टेस्ट फॉर सुपर स्पेशालिटी (NEET‑SS) की क्वालिफाइंग प्रतिशत को पहले के स्तर से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया जाए। यह आदेश देश भर में प्रवेश मानदंड को समान बनाने और कई राज्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के उद्देश्य से दिया गया है।
इस आदेश के बाद तमिलनाडु को 40 ऐसी सीटें वापस मिलेंगी जो पहले की प्रतिशत प्रणाली के कारण खाली रह गई थीं। राज्य के अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि इन सीटों की पुनः प्राप्ति क्षेत्र में सुपर‑स्पेशालिटी मेडिकल प्रशिक्षण की मांग को पूरा करने में मदद करेगी।
केंद्र को निर्देश दिया गया है कि वह संशोधित प्रतिशत को तुरंत लागू करे और सभी मेडिकल संस्थानों तथा राज्य प्राधिकरणों को इस बदलाव की सूचना दे। यह कदम NEET‑SS के उम्मीदवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने की उम्मीद है।
मेडिकल कॉलेजों और छात्र संगठनों सहित सभी हितधारक इस बदलाव के कार्यान्वयन को निकटता से देख रहे हैं, ताकि नई सीमा आगामी प्रवेश चक्र को बाधित न करे।
यह निर्णय शैक्षिक नीतियों से जुड़े विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, जो राष्ट्रीय मानकों और राज्य‑स्तर की सीट आवंटन दोनों को प्रभावित करता है।
इस आदेश के बाद तमिलनाडु को 40 ऐसी सीटें वापस मिलेंगी जो पहले की प्रतिशत प्रणाली के कारण खाली रह गई थीं। राज्य के अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि इन सीटों की पुनः प्राप्ति क्षेत्र में सुपर‑स्पेशालिटी मेडिकल प्रशिक्षण की मांग को पूरा करने में मदद करेगी।
केंद्र को निर्देश दिया गया है कि वह संशोधित प्रतिशत को तुरंत लागू करे और सभी मेडिकल संस्थानों तथा राज्य प्राधिकरणों को इस बदलाव की सूचना दे। यह कदम NEET‑SS के उम्मीदवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने की उम्मीद है।
मेडिकल कॉलेजों और छात्र संगठनों सहित सभी हितधारक इस बदलाव के कार्यान्वयन को निकटता से देख रहे हैं, ताकि नई सीमा आगामी प्रवेश चक्र को बाधित न करे।
यह निर्णय शैक्षिक नीतियों से जुड़े विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, जो राष्ट्रीय मानकों और राज्य‑स्तर की सीट आवंटन दोनों को प्रभावित करता है।