📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और यूटी को कैदियों में भेदभाव पर प्रतिक्रिया न देने पर आलोचना की
✍️ Nagaland Post
🗓 04 नव. 2026, 02:36 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को जेलों में भेदभाव के आरोपों पर प्रतिक्रिया न देने के लिए सार्वजनिक रूप से आलोचना की।
सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों और संघ शासित प्रदेशों पर कैदियों में भेदभाव के आरोपों पर प्रतिक्रिया न देने के लिए कड़ी आलोचना की। अदालत ने बताया कि इस तरह की उपेक्षा कैदियों के अधिकारों को कमजोर करती है और समानता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। अधिकारियों से तत्काल जांच करने और सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया गया।
अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि जेल प्रशासन को भेदभाव रहित प्रथाओं को अपनाना चाहिए और जाति, धर्म या लिंग की परवाह किए बिना सभी कैदियों को समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए। पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र और नियमित ऑडिट की माँग की गई।
यह आलोचना जेल प्रणाली में प्रणालीगत पूर्वाग्रहों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई है, जहाँ नागरिक समाज समूह सुधारों की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से कैद प्रणाली में मानवाधिकारों की सुरक्षा पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।
अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि जेल प्रशासन को भेदभाव रहित प्रथाओं को अपनाना चाहिए और जाति, धर्म या लिंग की परवाह किए बिना सभी कैदियों को समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए। पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र और नियमित ऑडिट की माँग की गई।
यह आलोचना जेल प्रणाली में प्रणालीगत पूर्वाग्रहों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई है, जहाँ नागरिक समाज समूह सुधारों की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से कैद प्रणाली में मानवाधिकारों की सुरक्षा पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।