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स्थानीय
सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी के किनारे 100 मीटर में निर्माण पर रोक, 500 मीटर तक खतरनाक उद्योगों पर प्रतिबंध
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 24 अग. 2026, 02:49 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी के दोनों किनारे 100 मीटर के निर्माण प्रतिबंध और खतरनाक उद्योगों पर 500 मीटर का अंतरिम प्रतिबंध लगाकर प्रदूषण रोकने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए कड़ा आदेश जारी किया है, जो जयपुर, राजस्थान से होकर बहती है। इस आदेश के तहत नदी के दोनों किनारे 100 मीटर की सीमा में किसी भी प्रकार का निर्माण या विकास कार्य प्रतिबंधित किया गया है।
निर्माण प्रतिबंध के साथ ही कोर्ट ने 500 मीटर के दायरे में स्थित खतरनाक औद्योगिक इकाइयों पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया है। इन उद्योगों को जल में हानिकारक अपशिष्ट छोड़ने वाली गतिविधियों को रोकना होगा, जब तक आगे की जांच नहीं हो जाती।
न्यायपालिका ने कहा कि यह कदम नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बचाने और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक है। राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों को अनुपालन की निगरानी करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि अनियंत्रित विकास ने लंबे समय से नदी की जल गुणवत्ता को बिगाड़ा है। कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों से आदेश के कार्यान्वयन पर समय‑समय पर रिपोर्ट देने को कहा है।
यह निर्णय भारत में पर्यावरणीय शासन में न्यायिक सक्रियता को दर्शाता है, जिससे स्पष्ट होता है कि पर्यावरणीय मुद्दों पर अदालतें सार्वजनिक हित के लिए निर्णायक कदम उठाने को तैयार हैं।
निर्माण प्रतिबंध के साथ ही कोर्ट ने 500 मीटर के दायरे में स्थित खतरनाक औद्योगिक इकाइयों पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया है। इन उद्योगों को जल में हानिकारक अपशिष्ट छोड़ने वाली गतिविधियों को रोकना होगा, जब तक आगे की जांच नहीं हो जाती।
न्यायपालिका ने कहा कि यह कदम नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बचाने और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक है। राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों को अनुपालन की निगरानी करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि अनियंत्रित विकास ने लंबे समय से नदी की जल गुणवत्ता को बिगाड़ा है। कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों से आदेश के कार्यान्वयन पर समय‑समय पर रिपोर्ट देने को कहा है।
यह निर्णय भारत में पर्यावरणीय शासन में न्यायिक सक्रियता को दर्शाता है, जिससे स्पष्ट होता है कि पर्यावरणीय मुद्दों पर अदालतें सार्वजनिक हित के लिए निर्णायक कदम उठाने को तैयार हैं।