📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subeesh Balan സുഭീഷ് ബാലൻ
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने जंतर मंतर के डीनोटिफिकेशन पर चुनौती दी, दिल्ली ने नई धरोहर स्थल जोड़े
✍️ India Today
🗓 15 अक्टू. 2026, 08:32 AM
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सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिकाएँ जंतर मंतर के डीनोटिफिकेशन पर चुनौती देती हैं, जबकि दिल्ली ने नई धरोहर स्थलों की घोषणा की है।
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर मंतर के डीनोटिफिकेशन पर दायर याचिकाएँ सुनी हैं, जो इस ऐतिहासिक खगोलीय अवलोकन स्थल को संरक्षित धरोहर सूची से हटाने के निर्णय पर सवाल उठाती हैं। याचिकाएँ दावा करती हैं कि इस कदम से राष्ट्रीय धरोहर कानूनों का उल्लंघन होता है और स्थल के सांस्कृतिक महत्व को कमज़ोर किया जाता है।
जंतर मंतर, 18वीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह II द्वारा निर्मित, अपनी वास्तुकला और वैज्ञानिक मूल्य के लिए प्रसिद्ध है। इस डीनोटिफिकेशन को दिल्ली सरकार द्वारा नए धरोहर स्थलों की घोषणा के साथ एक व्यापक समीक्षा का हिस्सा माना गया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि याचिकाएँ प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत स्थल की स्थिति को बनाए रखने के लिए हैं। अदालतें यह जांचेंगी कि सरकार का निर्णय कानूनी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक हित के अनुरूप था या नहीं।
दिल्ली प्रशासन ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रशासनिक दक्षता और नए धरोहर स्थलों को संसाधन आवंटित करने की आवश्यकता के कारण है। याचिकाओं का निर्णय राजधानी में धरोहर प्रबंधन के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
जंतर मंतर, 18वीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह II द्वारा निर्मित, अपनी वास्तुकला और वैज्ञानिक मूल्य के लिए प्रसिद्ध है। इस डीनोटिफिकेशन को दिल्ली सरकार द्वारा नए धरोहर स्थलों की घोषणा के साथ एक व्यापक समीक्षा का हिस्सा माना गया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि याचिकाएँ प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत स्थल की स्थिति को बनाए रखने के लिए हैं। अदालतें यह जांचेंगी कि सरकार का निर्णय कानूनी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक हित के अनुरूप था या नहीं।
दिल्ली प्रशासन ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रशासनिक दक्षता और नए धरोहर स्थलों को संसाधन आवंटित करने की आवश्यकता के कारण है। याचिकाओं का निर्णय राजधानी में धरोहर प्रबंधन के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।