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23 अग. 2026
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इथेनॉल के बढ़ते उपयोग से भारत में चीनी की कीमतों में उछाल, सरकार ने नीति पर की समीक्षा
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Edward S. Curtis
कृषि

इथेनॉल के बढ़ते उपयोग से भारत में चीनी की कीमतों में उछाल, सरकार ने नीति पर की समीक्षा

✍️ Vajiram & Ravi 🗓 23 अग. 2026, 12:18 AM 👁 7
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उच्च इथेनॉल मांग और आपूर्ति में बाधाओं के कारण भारत में चीनी की कीमतों में तेज़ी आई है, जिससे सरकार ने कदम उठाए हैं।

देश के प्रमुख बाजारों में व्यापारी इस सप्ताह चीनी की कीमतों में स्पष्ट उछाल की सूचना दे रहे हैं, जिससे निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों में चिंता बढ़ी है। यह वृद्धि मूल्य स्थिरता के एक दौर के बाद आई है, जिससे वर्तमान उछाल उद्योग का मुख्य बिंदु बन गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि कई परस्पर जुड़े कारक इस मूल्य वृद्धि के पीछे हैं। इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने की निरंतर नीति ने चीनी को फीडस्टॉक के रूप में मांग में बढ़ोतरी की है, जबकि गन्ने की फसल में मौसमी परिवर्तन ने घरेलू आपूर्ति को सीमित कर दिया है। साथ ही, वैश्विक चीनी बाजार में उतार‑चढ़ाव ने स्थानीय कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

प्रतिक्रिया स्वरूप, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बाजार की करीबी निगरानी की घोषणा की है और मूल्य अस्थिरता को कम करने के लिए बफ़र स्टॉक्स की रिहाई पर विचार कर रहा है। अधिकारियों ने इथेनॉल आवंटन ढाँचे की समीक्षा का संकेत भी दिया है, ताकि ईंधन की जरूरतों को खाद्य‑ग्रेड चीनी की उपलब्धता के साथ संतुलित किया जा सके।

यह स्थिति नीति निर्माताओं, किसानों और उद्योग समूहों के बीच व्यापक बहस को जन्म दे रही है। जबकि इथेनॉल के पक्षधर नवीकरणीय ईंधन लक्ष्यों की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं, आलोचक चेतावनी देते हैं कि चीनी के अत्यधिक उपयोग से खाद्य आपूर्ति पर दबाव पड़ेगा और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। सरकार के अगले कदम ऊर्जा लक्ष्य और कृषि स्थिरता के बीच संतुलन तय करेंगे।
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