📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / John Rostron
कृषि
मध्य प्रदेश में भूसा जलाने से प्रवर्तन में कमी उजागर
✍️ urbanacres.in
🗓 04 नव. 2026, 07:46 PM
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मध्य प्रदेश में हालिया भूसा जलाने की घटनाओं ने आग रोकथाम नियमों के प्रवर्तन में खामियों को उजागर किया है।
मध्य प्रदेश के कई जिलों में फसल कटाई के बाद किसान अपने खेतों में भूसा जलाने का सहारा ले रहे हैं, जिसे स्टबल बर्निंग कहा जाता है। इन आगों से धुएँ के बादल बनते हैं जो निकटवर्ती शहरों तक फैले हुए दिखाई देते हैं।
भूसा जलाना खेतों को जल्दी साफ करने का आसान तरीका है, पर यह वायु गुणवत्ता को बिगाड़ता है और लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। राज्य ने खुले में कृषि अपशिष्ट जलाने पर प्रतिबंध लगाने वाले नियम बनाए हुए हैं, जिसका उद्देश्य प्रदूषण को रोकना है।
इस वर्ष इन आगों की बार‑बार पुनरावृत्ति ने प्रवर्तन में स्पष्ट कमी को उजागर किया है। अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी कठिन है और दंड का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
पर्यावरण संगठनों और स्थानीय प्रशासन ने निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने और मल्चिंग या बायो‑एनर्जी जैसे वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने की मांग की है, ताकि खुले में जलाने पर निर्भरता कम हो सके।
यह स्थिति किसानों, प्रवर्तन एजेंसियों और नीति निर्माताओं के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि मौजूदा नियमों को वास्तविक रूप में लागू किया जा सके।
भूसा जलाना खेतों को जल्दी साफ करने का आसान तरीका है, पर यह वायु गुणवत्ता को बिगाड़ता है और लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। राज्य ने खुले में कृषि अपशिष्ट जलाने पर प्रतिबंध लगाने वाले नियम बनाए हुए हैं, जिसका उद्देश्य प्रदूषण को रोकना है।
इस वर्ष इन आगों की बार‑बार पुनरावृत्ति ने प्रवर्तन में स्पष्ट कमी को उजागर किया है। अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी कठिन है और दंड का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
पर्यावरण संगठनों और स्थानीय प्रशासन ने निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने और मल्चिंग या बायो‑एनर्जी जैसे वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने की मांग की है, ताकि खुले में जलाने पर निर्भरता कम हो सके।
यह स्थिति किसानों, प्रवर्तन एजेंसियों और नीति निर्माताओं के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि मौजूदा नियमों को वास्तविक रूप में लागू किया जा सके।