📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pratham Books from India
धर्म
उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज और प्रशासन में टकराव
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 10 सित. 2026, 09:32 AM
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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज और प्रशासन के बीच टकराव है; महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती ने हटाने पर विरोध का इशारा किया, जबकि प्रशासन ने प्रतिमा के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उज्जैन, मध्य प्रदेश – खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज और राज्य प्रशासन के बीच टकराव बढ़ गया है। महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती, जो एक वरिष्ठ धार्मिक नेता हैं, ने मंदिर को हटाने के खिलाफ स्पष्ट विरोध जताया है और चेतावनी दी है कि यदि मंदिर को हटाया गया तो उनके अनुयायी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
प्रशासन ने मीडिया को दिए गए जवाब में बताया कि उन्होंने प्रतिमा और मंदिर के परिसर के कानूनी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं की जांच की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी कार्रवाई को केवल उचित प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा, ताकि सामुदायिक तनाव से बचा जा सके।
संत समाज मंदिर को पूजा स्थल के रूप में संरक्षित रखने की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन संरचना की नियमों के अनुपालन को लेकर उठाए गए सवालों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। टकराव जारी है और स्थानीय निवासियों की नजरें आगे के विकास पर टिकी हैं।
अब तक कोई गिरफ्तारी या हिंसा की रिपोर्ट नहीं आई है, परन्तु कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति की करीबी निगरानी रखी है।
यह घटना उज्जैन जैसे प्राचीन मंदिरों वाले शहर में धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक निगरानी के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करती है।
प्रशासन ने मीडिया को दिए गए जवाब में बताया कि उन्होंने प्रतिमा और मंदिर के परिसर के कानूनी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं की जांच की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी कार्रवाई को केवल उचित प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा, ताकि सामुदायिक तनाव से बचा जा सके।
संत समाज मंदिर को पूजा स्थल के रूप में संरक्षित रखने की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन संरचना की नियमों के अनुपालन को लेकर उठाए गए सवालों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। टकराव जारी है और स्थानीय निवासियों की नजरें आगे के विकास पर टिकी हैं।
अब तक कोई गिरफ्तारी या हिंसा की रिपोर्ट नहीं आई है, परन्तु कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति की करीबी निगरानी रखी है।
यह घटना उज्जैन जैसे प्राचीन मंदिरों वाले शहर में धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक निगरानी के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करती है।