📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rehman Abubakr
अपराध
ST आयोग ने सीहोर में 12 आदिवासी घरों के ध्वंस पर सरकार से जवाब मांगा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 13 अक्टू. 2026, 09:16 AM
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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सीहोर के कोसमी गाँव में 12 आदिवासी घरों के ध्वंस को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को तीन दिन में जवाब देने का नोटिस जारी किया है, और मुख्यमंत्री ने जांच का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को कोसमी गाँव, सीहोर जिले में 12 आदिवासी घरों के ध्वंस संबंधी मामले में तीन दिन के भीतर जवाब देने का औपचारिक नोटिस भेजा है। आयोग ने इस कार्रवाई के अधिकार, कारण और प्रभावित परिवारों को दी गई कोई भी मुआवजा राशि की जानकारी मांगी है।
राज्य के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि उन्होंने किस आदेश के तहत और किन एजेंसियों के सहयोग से यह ध्वंस किया, इसकी पूरी विवरणी प्रस्तुत करें। आयोग ने कहा कि यदि संविधान के तहत आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन हुआ तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना की जानकारी मिलते ही एक विभागीय जांच का आदेश दिया, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जांच के परिणामों के आधार पर शीघ्र ही उचित उपाय किए जाएंगे।
स्थानीय आदिवासी प्रतिनिधियों ने घर और आजीविका के नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है और सरकार से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास प्रदान करने का आग्रह किया है। यह मामला राज्य में tribal land और आवास संबंधी विवादों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर करता है।
ST आयोग की इस कार्रवाई से मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए सतत निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के कई विवाद सामने आए हैं।
राज्य के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि उन्होंने किस आदेश के तहत और किन एजेंसियों के सहयोग से यह ध्वंस किया, इसकी पूरी विवरणी प्रस्तुत करें। आयोग ने कहा कि यदि संविधान के तहत आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन हुआ तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना की जानकारी मिलते ही एक विभागीय जांच का आदेश दिया, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जांच के परिणामों के आधार पर शीघ्र ही उचित उपाय किए जाएंगे।
स्थानीय आदिवासी प्रतिनिधियों ने घर और आजीविका के नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है और सरकार से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास प्रदान करने का आग्रह किया है। यह मामला राज्य में tribal land और आवास संबंधी विवादों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर करता है।
ST आयोग की इस कार्रवाई से मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए सतत निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के कई विवाद सामने आए हैं।