📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rajani Gairshail
राजनीति
सिक्किम के पूर्व मंत्री ने ‘4थ पाथवे’ पर स्पष्टता माँगी, अनुच्छेद 371F पर विधानसभा प्रस्ताव का आग्रह
✍️ India Today NE
🗓 17 सित. 2026, 01:33 AM
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सिक्किम के एक पूर्व मंत्री ने ‘4थ पाथवे’ की विस्तृत जानकारी मांगी और अनुच्छेद 371F पर विधानसभा को प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।
सिक्किम के पूर्व मंत्री ने ‘4थ पाथवे’ पर विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग की और राज्य विधानसभा से अनुच्छेद 371F पर एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। यह प्रस्ताव इस अनुच्छेद के तहत सिक्किम को मिलने वाले विशेष संवैधानिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।
‘4थ पाथवे’ एक विकास योजना को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है, परंतु इसके कार्यान्वयन के विवरण अभी अस्पष्ट हैं। अनुच्छेद 371F सिक्किम की स्वायत्तता और प्रशासनिक व्यवस्था को निर्धारित करता है, इसलिए कोई भी नई केंद्र सरकार की पहल राज्य स्तर पर जांच के अधीन होगी।
विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी केंद्रीय योजना सिक्किम की संवैधानिक विशेषताओं के अनुरूप हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राज्य सरकार पर केंद्र से स्पष्ट दिशा‑निर्देश माँगने का दबाव बढ़ेगा।
यह मांग उत्तरपूर्वी राज्यों में चल रहे संघ‑राज्य संबंधों के व्यापक बहस के बीच आई है, जहाँ कई राज्य अपनी स्वायत्तता को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्टता चाहते हैं। पूर्व मंत्री ने प्रस्ताव के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई, परंतु उन्होंने सिक्किम के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में विधानसभा की विधायी समिति इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक बुला सकती है।
‘4थ पाथवे’ एक विकास योजना को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है, परंतु इसके कार्यान्वयन के विवरण अभी अस्पष्ट हैं। अनुच्छेद 371F सिक्किम की स्वायत्तता और प्रशासनिक व्यवस्था को निर्धारित करता है, इसलिए कोई भी नई केंद्र सरकार की पहल राज्य स्तर पर जांच के अधीन होगी।
विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी केंद्रीय योजना सिक्किम की संवैधानिक विशेषताओं के अनुरूप हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राज्य सरकार पर केंद्र से स्पष्ट दिशा‑निर्देश माँगने का दबाव बढ़ेगा।
यह मांग उत्तरपूर्वी राज्यों में चल रहे संघ‑राज्य संबंधों के व्यापक बहस के बीच आई है, जहाँ कई राज्य अपनी स्वायत्तता को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्टता चाहते हैं। पूर्व मंत्री ने प्रस्ताव के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई, परंतु उन्होंने सिक्किम के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में विधानसभा की विधायी समिति इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक बुला सकती है।