📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
धर्म
धामी ने कहा, बंदी छोड़ दिवस मानवता की आज़ादी का प्रतीक
✍️ Amar Ujala · Amritsar
🗓 07 नव. 2026, 07:15 PM
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अमृतसर में धामी ने कहा कि वार्षिक बंदी छोड़ दिवस स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकार की याद दिलाता है।
धामी ने अमृतसर में आयोजित बंदी छोड़ दिवस समारोह में कहा कि यह दिन कैदियों की रिहाई का प्रतीक है और मानवता के स्वतंत्रता अधिकार की व्यापक याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि 1947 में ब्रिटिश शासन द्वारा सिख राजनीतिक कैदियों की रिहाई इस उत्सव की ऐतिहासिक जड़ है, और इसे आज के विश्वभर में स्वतंत्रता के संघर्षों से जोड़ा। धामी ने समुदाय से आग्रह किया कि इस दिन के मूल्यों—करुणा और न्याय—को याद रखें और उत्पीड़न के खिलाफ सतर्क रहें। यह बयान अमृत उजाला ने रिपोर्ट किया, जिसमें एकता और नैतिक जिम्मेदारी की बात की गई। स्थानीय लोग प्रार्थना और लंगर के साथ इस दिन को मनाते हुए इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को दोहराते रहे।
धामी ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता मानवता की सेवा से अलग नहीं हो सकती। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे इस उत्सव की भावना को जीवित रखें और मानव अधिकार व सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दें। पारंपरिक भजन और लंगर के साथ मनाया गया यह समारोह पंजाब में बंदी छोड़ दिवस की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
धामी ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता मानवता की सेवा से अलग नहीं हो सकती। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे इस उत्सव की भावना को जीवित रखें और मानव अधिकार व सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दें। पारंपरिक भजन और लंगर के साथ मनाया गया यह समारोह पंजाब में बंदी छोड़ दिवस की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।