📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harichandra Singh (Harish)
कृषि
शिवपुरी किसान ने मांगा मुआवजा, जमीन सरकारी दर्जा होने से हुई परेशानी
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 13 अक्टू. 2026, 04:16 PM
👁 19
शिवपुरी जिले के लखनगांव के किसान हरी सिंह गुर्जर ने कहा कि उनकी जमीन को माधव टाइगर रिज़र्व में सरकारी दर्जा मिलने से उन्हें मिलने वाले मुआवजे से वंचित किया गया है।
शिवपुरी जिले के लखनगांव गांव के किसान हरी सिंह गुर्जर ने कलेक्टर कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई कि उनकी खेती की जमीन को माधव टाइगर रिज़र्व के विस्तार के तहत सरकारी जमीन के रूप में दर्ज किया गया, जिससे उन्हें निर्धारित मुआवजा नहीं मिला।
माधव टाइगर रिज़र्व, मध्य प्रदेश के केंद्र में स्थित, उन किसानों के लिए मुआवजा योजना चलाता है जिनकी कृषि भूमि रिज़र्व की सीमा में आती है। इस योजना के तहत, यदि जमीन राजस्व रिकॉर्ड में निजी संपत्ति के रूप में दर्ज है, तो मालिक को बाजार मूल्य के आधार पर वित्तीय भुगतान मिलता है।
जनसुनवाई में गुर्जर ने बताया कि उनकी जमीन के सरकारी दर्जे में बदलने से उनका मुआवजा दावा रद्द हो गया है। उन्होंने अधिकारियों से रिकॉर्ड को सुधारने और लंबित मुआवजा जारी करने की मांग की, क्योंकि खेती योग्य भूमि खोने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अधिकारियों ने शिकायत को स्वीकार किया और कहा कि इस मुद्दे को वन विभाग को भेजा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया में किसी भी त्रुटि को सुधारा जाएगा, पर सुनवाई के दौरान कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई।
माधव टाइगर रिज़र्व, मध्य प्रदेश के केंद्र में स्थित, उन किसानों के लिए मुआवजा योजना चलाता है जिनकी कृषि भूमि रिज़र्व की सीमा में आती है। इस योजना के तहत, यदि जमीन राजस्व रिकॉर्ड में निजी संपत्ति के रूप में दर्ज है, तो मालिक को बाजार मूल्य के आधार पर वित्तीय भुगतान मिलता है।
जनसुनवाई में गुर्जर ने बताया कि उनकी जमीन के सरकारी दर्जे में बदलने से उनका मुआवजा दावा रद्द हो गया है। उन्होंने अधिकारियों से रिकॉर्ड को सुधारने और लंबित मुआवजा जारी करने की मांग की, क्योंकि खेती योग्य भूमि खोने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अधिकारियों ने शिकायत को स्वीकार किया और कहा कि इस मुद्दे को वन विभाग को भेजा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया में किसी भी त्रुटि को सुधारा जाएगा, पर सुनवाई के दौरान कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई।