स्थानीय
शिवपुरी में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की समीक्षा की
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने शिवपुरी में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर महिला कल्याण, सुरक्षा, विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की। उन्होंने महिला सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और विभिन्न अपराधों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया।
शिवपुरी, 28 सितम्बर। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार शिवपुरी में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से महिलाओं के कल्याण, उनकी सुरक्षा, विधिक सहायता की उपलब्धता तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', 'सुकन्या समृद्धि योजना', 'मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना', 'मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना', विधवा पेंशन और 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। साथ ही, मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और 'मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं की निगरानी, आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण मटका तथा महिलाओं और बालिकाओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक मेडिकल, कानूनी, काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसे अपराधों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ जन-जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए। पुलिस को महिलाओं से संबंधित मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज करने, विवेचना पूरी कर समयबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए। महिला तस्करी, साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने की भी आवश्यकता बताई गई।
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। जिले के ऐसे सभी सरकारी और निजी संस्थानों, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के निर्देश दिए गए। इन समितियों के सदस्यों के लिए नियमित प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन आयोजित करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंपी गई। वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संचालित 'प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर' (तेरे मेरे सपने) स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए। महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान के लिए 10 सूत्रीय कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें महिला कल्याण योजनाओं के नियमित ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति तथा वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, एएचटी डेस्क और सीएडब्ल्यू सेल के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सम्मान से जुड़ी है। उन्होंने अधिकारियों से महिलाओं की समान भागीदारी और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया। बैठक में म.प्र. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, सदस्य श्रीमती साधना स्थापक, पुलिस अधीक्षक श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया सहित अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं की निगरानी, आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण मटका तथा महिलाओं और बालिकाओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक मेडिकल, कानूनी, काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसे अपराधों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ जन-जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए। पुलिस को महिलाओं से संबंधित मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज करने, विवेचना पूरी कर समयबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए। महिला तस्करी, साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने की भी आवश्यकता बताई गई।
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। जिले के ऐसे सभी सरकारी और निजी संस्थानों, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के निर्देश दिए गए। इन समितियों के सदस्यों के लिए नियमित प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन आयोजित करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंपी गई। वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संचालित 'प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर' (तेरे मेरे सपने) स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए। महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान के लिए 10 सूत्रीय कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें महिला कल्याण योजनाओं के नियमित ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति तथा वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, एएचटी डेस्क और सीएडब्ल्यू सेल के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सम्मान से जुड़ी है। उन्होंने अधिकारियों से महिलाओं की समान भागीदारी और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया। बैठक में म.प्र. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, सदस्य श्रीमती साधना स्थापक, पुलिस अधीक्षक श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया सहित अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।