📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Development of North Eastern Region
बिज़नेस
शश्वत गोयनका ने कहा: निजी निवेश से बनाएं $44 बिलियन का भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
✍️ Fortune India
🗓 10 सित. 2026, 08:44 AM
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व्यवसायी शश्वत गोयनका ने फॉर्च्यून इंडिया को बताया कि $44 बिलियन के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए निजी पूँजी और नई क्षमताओं की जरूरत है।
शश्वत गोयनका, एक प्रमुख भारतीय व्यवसायी, ने फॉर्च्यून इंडिया के साथ साक्षात्कार में कहा कि $44 बिलियन के अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल सरकारी फंडिंग से नहीं हासिल किया जा सकता। उन्होंने निजी पूँजी और विशेष क्षमताओं के विकास को इस क्षेत्र के विस्तार के लिए आवश्यक बताया।
उन्होंने वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक कंपनियां उपग्रह लॉन्च, लॉन्च‑सेवा बाजार और डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों को आगे बढ़ा रही हैं, और भारत को भी इसी तरह सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल अपनाना चाहिए।
गोयनका ने बताया कि जबकि इसरो एक मजबूत लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है, $44 बिलियन के बाजार तक पहुंचने के लिए वेंचर फंडिंग, निजी अनुसंधान एवं विकास और स्पष्ट नियामक ढांचा व कर प्रोत्साहन जैसी नीतियों की जरूरत होगी।
उनकी टिप्पणी भारतीय सरकार के मसौदा राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के साथ आती है, जो निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और अंतरिक्ष‑संबंधी स्टार्ट‑अप्स के लिए अनुकूल माहौल बनाने का लक्ष्य रखती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि आवश्यक पूँजी प्रवाह सुनिश्चित हो जाए तो एक सफल निजी अंतरिक्ष उद्योग हजारों उच्च‑कौशल नौकरियों का सृजन कर सकता है और निर्यात आय में वृद्धि कर सकता है।
उन्होंने वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक कंपनियां उपग्रह लॉन्च, लॉन्च‑सेवा बाजार और डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों को आगे बढ़ा रही हैं, और भारत को भी इसी तरह सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल अपनाना चाहिए।
गोयनका ने बताया कि जबकि इसरो एक मजबूत लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है, $44 बिलियन के बाजार तक पहुंचने के लिए वेंचर फंडिंग, निजी अनुसंधान एवं विकास और स्पष्ट नियामक ढांचा व कर प्रोत्साहन जैसी नीतियों की जरूरत होगी।
उनकी टिप्पणी भारतीय सरकार के मसौदा राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के साथ आती है, जो निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और अंतरिक्ष‑संबंधी स्टार्ट‑अप्स के लिए अनुकूल माहौल बनाने का लक्ष्य रखती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि आवश्यक पूँजी प्रवाह सुनिश्चित हो जाए तो एक सफल निजी अंतरिक्ष उद्योग हजारों उच्च‑कौशल नौकरियों का सृजन कर सकता है और निर्यात आय में वृद्धि कर सकता है।