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शारदा नदी के कटान में 4 बीघा धान की फसल बही, सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर खतरा
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सीतापुर। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे इलाकों में कटान तेज हो गया है। कटान की चपेट में आने से करीब 4 बीघा धान की खड़ी फसल नदी में समा गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं नदी का कटान लगातार जारी रहने से आसपास की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर खतरा मंडरा रहा है।
सीतापुर। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे इलाकों में कटान तेज हो गया है। कटान की चपेट में आने से करीब 4 बीघा धान की खड़ी फसल नदी में समा गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं नदी का कटान लगातार जारी रहने से आसपास की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर खतरा मंडरा रहा है।
बताया जा रहा है कि नदियों के जलस्तर में करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर बढ़ने के साथ शारदा नदी का बहाव तेज हुआ है और कई स्थानों पर किनारों की मिट्टी तेजी से कट रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा और कटान पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा सकती है। इससे धान सहित अन्य फसलों को भी भारी नुकसान होने की आशंका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से नदी कटान को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने तथा प्रभावित किसानों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर और कटान को देखते हुए ग्रामीणों में भी भय का माहौल है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखे जाने की जरूरत है, ताकि कटान को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
बताया जा रहा है कि नदियों के जलस्तर में करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर बढ़ने के साथ शारदा नदी का बहाव तेज हुआ है और कई स्थानों पर किनारों की मिट्टी तेजी से कट रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा और कटान पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा सकती है। इससे धान सहित अन्य फसलों को भी भारी नुकसान होने की आशंका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से नदी कटान को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने तथा प्रभावित किसानों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर और कटान को देखते हुए ग्रामीणों में भी भय का माहौल है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखे जाने की जरूरत है, ताकि कटान को आगे बढ़ने से रोका जा सके।