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13 सित. 2026
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वैज्ञानिकों ने ई20 ईंधन नीति पर जल और फसल जोखिम को लेकर विरोध किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Leonhard Lenz
कृषि

वैज्ञानिकों ने ई20 ईंधन नीति पर जल और फसल जोखिम को लेकर विरोध किया

✍️ Amar Ujala 🗓 13 सित. 2026, 06:39 PM 👁 6
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भारतीय वैज्ञानिकों ने ई20 ईंधन नीति के खिलाफ आवाज़ उठाई, क्योंकि इसे जल संसाधन, फसल और भूजल पर नकारात्मक असर पड़ने की चिंता है। उन्होंने विज्ञान‑आधारित नीति की मांग की।

नई दिल्ली – भारतीय वैज्ञानिकों ने सरकार द्वारा ई20 ईंधन को बढ़ावा देने के निर्णय पर खुलकर असंतोष जताया है। वे मानते हैं कि इस नीति से जल उपलब्धता, फसल उत्पादन और भूजल स्तर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ खेती बरसाती जल पर निर्भर है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिये बड़ी मात्रा में जल और कृषि भूमि की आवश्यकता होती है, जो खाद्य फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। वे चेतावनी देते हैं कि जल और कृषि भूमि को इथेनॉल की ओर मोड़ने से भारत की जल तालाबों और कृषि क्षेत्र पर पहले से मौजूद दबाव बढ़ सकता है।

पर्यावरणीय चिंताओं के साथ, शोधकर्ताओं ने नीति निर्माताओं से ईंधन रणनीतियों में विज्ञान‑आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा लक्ष्यों को देश की कृषि और जल सुरक्षा के साथ संतुलित करने के लिये कठोर प्रभाव मूल्यांकन और हितधारकों की सलाह आवश्यक है।

वैज्ञानिकों का यह विरोध ईंधन मिश्रण में इथेनॉल के उपयोग की व्यवहार्यता पर चल रहे राष्ट्रीय बहस में एक नया आयाम जोड़ता है।
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