📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Saudi Press Agency (SPA)
विदेश
सऊदी अरब ने मक्का समझौते के कार्यान्वयन की मांग की
✍️ theprint.in
🗓 25 सित. 2026, 09:37 AM
👁 12
सऊदी अधिकारियों ने मक्का समझौते के त्वरित कार्यान्वयन की अपील की, मुस्लिम देशों को सहयोग करने का आग्रह किया।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने मक्का समझौते के तहत किए गए वादों को ठोस कदमों में बदलने की मांग की है, जो पिछले वर्ष शुरू किया गया एक बहुपक्षीय ढांचा है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
एक प्रेस ब्रीफ़िंग में मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि समझौते के लक्ष्य – आतंकवाद का मुकाबला, युवा सशक्तिकरण और व्यापार सुलभता – तभी सफल हो सकते हैं जब सदस्य देशों द्वारा इन्हें कार्यात्मक नीतियों में बदला जाए।
सऊदी प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि तीस से अधिक देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, परंतु प्रगति में असमानता है। उन्होंने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और प्रत्येक सरकार से समय‑सीमा तय करने, संसाधन आवंटित करने और कार्यान्वयन के माइलस्टोन की रिपोर्ट देने का आग्रह किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब को मुस्लिम दुनिया में एकीकृत शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में है, विशेषकर क्षेत्रीय तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच। मंत्रालय ने कहा कि अनुपालन की निगरानी के लिए आने वाले हफ्तों में फॉलो‑अप मीटिंग्स आयोजित की जाएँगी।
नई वित्तीय प्रतिबद्धताओं का उल्लेख नहीं किया गया, परंतु राजनीतिक इच्छाशक्ति और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया, ताकि मक्का समझौता एक प्रभावी विकास उपकरण बन सके।
एक प्रेस ब्रीफ़िंग में मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि समझौते के लक्ष्य – आतंकवाद का मुकाबला, युवा सशक्तिकरण और व्यापार सुलभता – तभी सफल हो सकते हैं जब सदस्य देशों द्वारा इन्हें कार्यात्मक नीतियों में बदला जाए।
सऊदी प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि तीस से अधिक देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, परंतु प्रगति में असमानता है। उन्होंने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और प्रत्येक सरकार से समय‑सीमा तय करने, संसाधन आवंटित करने और कार्यान्वयन के माइलस्टोन की रिपोर्ट देने का आग्रह किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब को मुस्लिम दुनिया में एकीकृत शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में है, विशेषकर क्षेत्रीय तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच। मंत्रालय ने कहा कि अनुपालन की निगरानी के लिए आने वाले हफ्तों में फॉलो‑अप मीटिंग्स आयोजित की जाएँगी।
नई वित्तीय प्रतिबद्धताओं का उल्लेख नहीं किया गया, परंतु राजनीतिक इच्छाशक्ति और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया, ताकि मक्का समझौता एक प्रभावी विकास उपकरण बन सके।