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22 सित. 2026
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सतलुज नदी के प्रदूषण के खिलाफ विधायक दिनेश चड्ढा की याचिका पर एनजीटी ने हिमाचल और हरियाणा सरकारों को किया तलब
राजनीति

सतलुज नदी के प्रदूषण के खिलाफ विधायक दिनेश चड्ढा की याचिका पर एनजीटी ने हिमाचल और हरियाणा सरकारों को किया तलब

✍️ रिपोर्टर: Sandeep Kumar Joshi 🗓 11 सित. 2026, 05:47 PM 👁 58
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पंजाब के रूपनगर विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा सिरसा नदी के प्रदूषण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

पंजाब की सतलुज नदी को अन्य राज्यों से आ रहे औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए विधानसभा क्षेत्र रूपनगर के विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा उठाई गई आवाज अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गई है। सिरसा नदी के प्रदूषण और इसके निचले बहाव के माध्यम से रूपनगर में सतलुज नदी पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर विधायक द्वारा दायर मूल आवेदन संख्या 527/2026 पर 9 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

9 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी की बेंच, जिसमें चेयरपर्सन माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे, ने मामले को पर्यावरण संबंधी नियमों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए आदेश जारी किए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित फार्मास्यूटिकल और अन्य औद्योगिक इकाइयां बिना उपचार या आंशिक रूप से उपचारित गंदा पानी ड्रेनेज चैनलों, सहायक नदियों और सिरसा नदी में छोड़ रही हैं, जिससे नदी के पानी में दुर्गंध आ रही है। इसके अलावा, सीवेज और ठोस कचरे के प्राकृतिक जल प्रवाह में डाले जाने और बद्दी क्षेत्र में स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की अपर्याप्त क्षमता का भी मुद्दा उठाया गया है।

विधायक दिनेश चड्ढा ने इन आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और विभिन्न समाचार रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि सतलुज नदी पंजाब की जीवन रेखा है और किसी भी दूसरे राज्य द्वारा इसमें प्रदूषित पानी या औद्योगिक कचरा डालना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विधायक ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल नदी के पानी का नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

एनजीटी द्वारा नोटिस जारी करने को एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम बताते हुए विधायक चड्ढा ने कहा कि जब तक सिरसा नदी के माध्यम से सतलुज में पहुंच रहे प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वह इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाते रहेंगे और पंजाब के हितों के लिए हिमाचल और हरियाणा सरकारों के साथ लड़ाई जारी रखेंगे। एनजीटी ने विधायक को प्रतिवादियों को नोटिस की तामील करवाने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
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