सर्वसम्मति की मिसाल: भदड़िया ग्राम पंचायत में ग्रामीणों की सहमति से दलाराम मेघवाल सरपंच घोषित
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सर्वसम्मति की मिसाल: भदड़िया ग्राम पंचायत में ग्रामीणों की सहमति से दलाराम मेघवाल सरपंच घोषित
भदड़िया:
ग्राम पंचायत भदड़िया में ग्रामीणों ने आपसी सौहार्द और सामाजिक सद्भाव की एक अनोखी मिसाल पेश की है। आगामी पंचायत चुनावों की घोषणा और तिथियों के औपचारिक समय से पहले ही, ग्रामीणों ने एकजुट होकर सर्वसम्मति से दलाराम मेघवाल को सरपंच पद के लिए चुनने का निर्णय लिया है।
यह निर्णय गांव में आयोजित एक सर्वजन बैठक के दौरान लिया गया। उल्लेखनीय है कि इस बार ग्राम पंचायत भदड़िया में सरपंच पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित (Reserved) घोषित हुआ था। सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर उनके नाम पर सहमति जताई और उन्हें गांव का मुखिया (सरपंच) घोषित कर दिया।
आपसी भाईचारे और समय की बचत की पहल
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में होने वाली गुटबाजी, आपसी मनमुटाव और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले से न केवल गांव में आपसी सौहार्द मजबूत होगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया भी शांतिपूर्ण रहेगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया अभी शेष
हालांकि ग्रामीणों ने सामाजिक स्तर पर दलाराम मेघवाल को अपना सरपंच स्वीकार कर लिया है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के नियमानुसार आगामी चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन की तिथि आने पर दलाराम जी को आधिकारिक तौर पर अपना पर्चा दाखिल करना होगा। नामांकन जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही चुनाव आयोग द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से निर्विरोध विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा।
गांव के इस सर्वसम्मत फैसले की आसपास के क्षेत्रों में काफी सराहना हो रही है और इसे पंचायती राज व्यवस्था में आपसी सामंजस्य का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
भदड़िया:
ग्राम पंचायत भदड़िया में ग्रामीणों ने आपसी सौहार्द और सामाजिक सद्भाव की एक अनोखी मिसाल पेश की है। आगामी पंचायत चुनावों की घोषणा और तिथियों के औपचारिक समय से पहले ही, ग्रामीणों ने एकजुट होकर सर्वसम्मति से दलाराम मेघवाल को सरपंच पद के लिए चुनने का निर्णय लिया है।
यह निर्णय गांव में आयोजित एक सर्वजन बैठक के दौरान लिया गया। उल्लेखनीय है कि इस बार ग्राम पंचायत भदड़िया में सरपंच पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित (Reserved) घोषित हुआ था। सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर उनके नाम पर सहमति जताई और उन्हें गांव का मुखिया (सरपंच) घोषित कर दिया।
आपसी भाईचारे और समय की बचत की पहल
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में होने वाली गुटबाजी, आपसी मनमुटाव और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले से न केवल गांव में आपसी सौहार्द मजबूत होगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया भी शांतिपूर्ण रहेगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया अभी शेष
हालांकि ग्रामीणों ने सामाजिक स्तर पर दलाराम मेघवाल को अपना सरपंच स्वीकार कर लिया है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के नियमानुसार आगामी चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन की तिथि आने पर दलाराम जी को आधिकारिक तौर पर अपना पर्चा दाखिल करना होगा। नामांकन जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही चुनाव आयोग द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से निर्विरोध विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा।
गांव के इस सर्वसम्मत फैसले की आसपास के क्षेत्रों में काफी सराहना हो रही है और इसे पंचायती राज व्यवस्था में आपसी सामंजस्य का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।