शिक्षा
सरकारी स्कूलों में रिकॉर्ड कार्यों के बीच शिक्षकों की समर्पण की कहानी
उदासीनता और बढ़ते रिकॉर्ड कार्यों के बीच, एक शिक्षिका ने छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी और समर्पण को उजागर किया।
आजकल दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका, स्कूल के रिकॉर्ड कार्यों के बीच अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करती हैं। UDISE+ के कार्यभार में वृद्धि के साथ, समय की कमी और अतिरिक्त कागजी कार्रवाई ने शिक्षण के लिए कम समय छोड़ा है।
हाल ही में एक बेसिक शिक्षक स्कूल में आए और बोले, "आप लोग समझते होंगे कि हमारे स्कूल के बच्चों को कुछ नहीं आता तो हम मेहनत नहीं करते हैं", पर शिक्षिका ने बताया कि रिकॉर्ड कार्यों में बढ़ोतरी के कारण समय नहीं मिलता।
इन चुनौतियों के बावजूद, कई सरकारी स्कूल के शिक्षक बच्चों को अच्छा सिखा रहे हैं। शिक्षिका का मानना है कि शिक्षण में त्याग की भावना होनी चाहिए और जब तक हमें लगे कि हम बच्चों का भला कर सकते हैं, तभी यह काम करना चाहिए। वह कहती हैं कि हर कक्षा में कैमरा है, और जब नहीं थे, तब भी वह चीज़ों को पकड़ लेती थीं।
बच्चे रोज स्कूल नहीं आते, घर जाकर पढ़ने नहीं बैठते, और अभिभावकों को इस जिम्मेदारी को समझना चाहिए। शिक्षिका ने आग्रह किया कि कामधंधे के दिनों को छोड़कर बाकी दिनों में बच्चों को रोज स्कूल भेजें, क्योंकि ये बच्चे देश के भविष्य हैं।
इन दिनों धान की कटाई चल रही है, कम ही बच्चे आ रहे हैं, पर तस्वीर में जो बच्चे दिखाई देते हैं, वे पूरी ऊर्जा के साथ सीख रहे हैं।
हाल ही में एक बेसिक शिक्षक स्कूल में आए और बोले, "आप लोग समझते होंगे कि हमारे स्कूल के बच्चों को कुछ नहीं आता तो हम मेहनत नहीं करते हैं", पर शिक्षिका ने बताया कि रिकॉर्ड कार्यों में बढ़ोतरी के कारण समय नहीं मिलता।
इन चुनौतियों के बावजूद, कई सरकारी स्कूल के शिक्षक बच्चों को अच्छा सिखा रहे हैं। शिक्षिका का मानना है कि शिक्षण में त्याग की भावना होनी चाहिए और जब तक हमें लगे कि हम बच्चों का भला कर सकते हैं, तभी यह काम करना चाहिए। वह कहती हैं कि हर कक्षा में कैमरा है, और जब नहीं थे, तब भी वह चीज़ों को पकड़ लेती थीं।
बच्चे रोज स्कूल नहीं आते, घर जाकर पढ़ने नहीं बैठते, और अभिभावकों को इस जिम्मेदारी को समझना चाहिए। शिक्षिका ने आग्रह किया कि कामधंधे के दिनों को छोड़कर बाकी दिनों में बच्चों को रोज स्कूल भेजें, क्योंकि ये बच्चे देश के भविष्य हैं।
इन दिनों धान की कटाई चल रही है, कम ही बच्चे आ रहे हैं, पर तस्वीर में जो बच्चे दिखाई देते हैं, वे पूरी ऊर्जा के साथ सीख रहे हैं।