राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी एससी/एसटी अधिनियम शिकायतों पर कड़ी फटकार, सवर्ण समाज की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एससी/एसटी अधिनियम का दुरुपयोग 99% तक झूठी शिकायतों में हो रहा है और इसे न्याय के लिये नहीं, बल्के ब्लैकमेल के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने हालिया सुनवाई में कहा कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज की जा रही 99% शिकायतें फर्जी हैं और यह कानून न्याय के लिये नहीं, बल्कि ब्लैकमेल और जातिवादी राजनीति के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम का उद्देश्य सामाजिक न्याय है और इसे दुरुपयोग करने वाले किसी भी वर्ग, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री सहित, के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस फटकार ने विभिन्न वर्गों के पीड़ितों, जिनमें सवर्ण, ओबीसी और अन्य समुदाय शामिल हैं, में आशा की लहर पैदा की है कि भविष्य में झूठी शिकायतों को रोकने के लिये सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कई सामाजिक संगठनों और राजनेताओं ने इस फैसले को स्वागत किया और साथ ही यूजीसी नियमों को वापस लेने तथा आरक्षण को आर्थिक आधार पर पुनः विचार करने की मांग की, जिससे जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक जरूरतों के आधार पर आरक्षण प्रदान किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की इस चेतावनी से यह स्पष्ट होता है कि फर्जी शिकायतों और जातिवादी राजनीति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज किया जाएगा और भविष्य में ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिये कड़े नियमन लागू किए जाएंगे।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम का उद्देश्य सामाजिक न्याय है और इसे दुरुपयोग करने वाले किसी भी वर्ग, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री सहित, के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस फटकार ने विभिन्न वर्गों के पीड़ितों, जिनमें सवर्ण, ओबीसी और अन्य समुदाय शामिल हैं, में आशा की लहर पैदा की है कि भविष्य में झूठी शिकायतों को रोकने के लिये सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कई सामाजिक संगठनों और राजनेताओं ने इस फैसले को स्वागत किया और साथ ही यूजीसी नियमों को वापस लेने तथा आरक्षण को आर्थिक आधार पर पुनः विचार करने की मांग की, जिससे जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक जरूरतों के आधार पर आरक्षण प्रदान किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की इस चेतावनी से यह स्पष्ट होता है कि फर्जी शिकायतों और जातिवादी राजनीति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज किया जाएगा और भविष्य में ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिये कड़े नियमन लागू किए जाएंगे।