Local
सलेमपुर में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पवित्र व्रत: दाम्पत्य सुख और दीर्घायु की कामना
सलेमपुर की सुहागिन महिलाएँ 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखकर पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि की कामना करेंगी।
सलेमपुर में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पवित्र व्रत मनाया जाएगा, जो दाम्पत्य सुख और पति की दीर्घायु की कामना का पवित्र पर्व माना जाता है।
इस दिन महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें चतुर्थी तिथि की शुरुआत सुबह 1 बजकर 6 मिनट पर और समापन रात 10 बजकर 9 मिनट पर होता है। चंद्रदय रात्रि 8 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक स्थान के अनुसार बदलती है।
व्रत रखने वाली महिलाएँ प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव तथा करवा माता का स्मरण कर व्रत का संकल्प लेती हैं। पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर प्रतिमा स्थापित की जाती है, और रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, फल, मिठाई, सुहाग सामग्री और जल से भरा करवा रखा जाता है।
पहले गणेश जी का पूजन कर विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की जाती है, फिर शिव, पार्वती और करवा माता का पूजन कर अखंड सौभाग्य एवं पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। पूजा के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है, और परंपरा के अनुसार करवा का आदान-प्रदान तथा चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात पति का दर्शन कर उनके हाथों से जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।
इस दिन महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें चतुर्थी तिथि की शुरुआत सुबह 1 बजकर 6 मिनट पर और समापन रात 10 बजकर 9 मिनट पर होता है। चंद्रदय रात्रि 8 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक स्थान के अनुसार बदलती है।
व्रत रखने वाली महिलाएँ प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव तथा करवा माता का स्मरण कर व्रत का संकल्प लेती हैं। पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर प्रतिमा स्थापित की जाती है, और रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, फल, मिठाई, सुहाग सामग्री और जल से भरा करवा रखा जाता है।
पहले गणेश जी का पूजन कर विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की जाती है, फिर शिव, पार्वती और करवा माता का पूजन कर अखंड सौभाग्य एवं पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। पूजा के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है, और परंपरा के अनुसार करवा का आदान-प्रदान तथा चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात पति का दर्शन कर उनके हाथों से जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।