🔥 ट्रेंडिंग नई रामायण फिल्म में बाइनरी दृष्टिकोण स... गॉडज़िला माइनस ज़ीरो ने रिकॉर्ड ओपनिंग... मिज़ोरम में बिजली कटौती से व्यापार में... भारतीय सेना ने चीन के 50 किमी अरुणाचल... भारत के युवा मुख्यमंत्री शासन में नई द... कुलगाम में चीनी पिस्तौल और ग्रेनेड वाल...
09 नव. 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
*सचिव ने किया विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

*सचिव ने किया विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

✍️ रिपोर्टर: Rajendra Kumar sen 🗓 23 सित. 2026, 07:18 AM 👁 93
यहाँ देखें: ▶️ YouTube
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
*सचिव ने किया विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन*
जैसलमेर, 22 सिंतबर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान के निर्देशों की पालना में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर ओमी पुरोहित के निर्देशन में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललित पुरोहित द्वारा राजकीय श्री जवाहिर चिकित्सालय जैसलमेर के जिला स्वास्थ्य भवन में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथा, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 व साइबर अपराधों से दूरी एवं बचाव के विषयों पर विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुरलीधर सोनी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी रवीन्द्र साँखला, खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा सहित चिकित्सा विभाग की महिला कर्मचारीगण उपस्थित रही।
कार्यशाला में सचिव ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने और यौन उत्पीड़न को रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2013 में ‘‘कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (जिसे संक्षिप्त में PoSH Act भी कहा जाता है) लागू किया। इस कानून की नींव माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के ऐतिहासिक ‘‘विशाखा बनाम राजस्थान राज्य, 1997’’ फैसले में दिए गए दिशा निर्देशों पर आधारित है। संगठित व असंगठित दोनों क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए एक ऐसे सशक्त कानून की आवश्यकता महसूस की गई, जो उन्हें भयमुक्त, सम्मानजनक और समानता का वातावरण प्रदान कर सके।
इस अधिनियम का सबसे मुख्य प्रावधान आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना है, 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान (सरकारी, निजी, एनजीओ या कॉर्पाेरेट) के लिए कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति गठित करना अनिवार्य है। कार्यस्थल में केवल मुख्य कार्यालय ही नहीं बल्कि व्यावसायिक यात्राएँ, कंपनी की गाड़ियाँ और आधिकारिक डिजिटल माध्यम (ई-मेल, व्हाट्स एप आदि) भी शामिल हैं।
उन्होंने शिविर में उपस्थित कर्मचारीगण को यह भी बताया कि इस अधिनियम के तहत अनचाहा शारीरिक स्पर्श, द्वि-अर्थी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करना, अश्लील चित्र/वीडियो सामग्री दिखाना एवं कोई अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक/गैर-मौखिक व्यवहार शामिल हैं। पीड़िता घटना घटने की तिथि से तीन महीने के भीतर आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। महिला केन्द्र सरकार के ऑनलाईन पोर्टल SHe-Box के माध्यम से भी सीधी शिकायत दर्ज करा सकती है। आंतरिक शिकायत समिति का दायित्व है वह शिकायत पर विधिपूर्वक 90 दिनों के भीतर पीड़िता की गोपनीयता का ध्यान रखते हुवें जाँच पूरी करें।
इसके साथ ही सचिव ने ‘‘साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट’’ के गंभीर विषय पर उपस्थित कर्मचारीगण को आसान विधिक भाषा में जानकारी साझा करते हुए बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर या इंटरनेट के जरिए की जाने वाली ठगी को साइबर धोखाधड़ी कहते हैं एवं डिजिटल अरेस्ट में ठग आपको पुलिस, सीबीआई या क्राइम ब्रांच की यूनिफॉर्म पहनकर वीडियो कॉल कर आपको डिजिटली डरा-धमकाकर पैसे ऐंठते है। वास्तविकता में कानून में ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ नाम की कोई चीज नहीं होती। पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। उन्होंने कार्यशाला आगे बढ़ाते हुए साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट से बचाव के सुझावों का जिक्र करते हुए बताया कि आप अपना बैंक खाता संख्या, पासवर्ड, या मोबाइल पर आया ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति से शेयर न करें। अगर कोई फोन पर आपको पुलिस या अफसर बनकर डराए या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करने की धमकी दें, तो घबराएं नहीं, तुरंत फोन काट दें। व्हाट्सएप या एसएमएस पर आए किसी भी अनजान मैसेज या लालच वाले लिंक को न खोलें। कोई भी समस्या हो, तो अकेले घबराने की जगह तुरंत अपने परिवार, दोस्तों या स्थानीय पुलिस थाने को बताएं। भारत सरकार एवं राज्य सरकार ने इस विषय की गंभीरता पर मंथन करते हुए व साइबर अपराधों से जुड़ी शिकायतो के शीघ्र निस्तारण को ध्यान में रखते हुए साइबर हेल्पलाईन 1930 व राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी पोर्टल) शुरू किया है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर ने समाज के कमजोर वर्गाें, महिलाओं, नाबालिगों और कम आय वाले साइबर फ्रॉड पीडितों के लिए निःशुल्क वकील, दस्तावेज तैयार करने और अदालत में पैरवी करने की सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु ‘‘रालसा (साइबर अपराध के पीड़ितों के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2025’’ लागू की है। कार्यशाला में उन्होंने विधिक सहायता हेतु संचालित की जा रही निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाईन नंबर 15100 के बारे में अवगत करवाया। अंत में उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित चिकित्सा विभाग के अधिकारीगण व महिला कर्मचारीगण को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संदेश दिया कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है, सतर्क रहें, डरे नहीं और दूसरों को भी जागरूक करें।
📲Get App