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सूचना अधिकार के तहत निरीक्षण के लिए पहुंचे आवेदक, अधिकारी अनुपस्थित: रिकॉर्ड देखने से वंचित
कुशलगढ़ में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के निरीक्षण के लिए पहुंचे एक फाउंडेशन के निदेशक को संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण निरीक्षण करने का अवसर नहीं मिला।
कुशलगढ़ में सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के संबंध में Kalkivaram Social Welfare Foundation के निदेशक को महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) के राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं CDPO की अनुपस्थिति के कारण रिकॉर्ड का निरीक्षण करने में असफलता हाथ लगी। विभाग ने पहले एक पत्र जारी कर आवेदक को कार्यालय में उपस्थित होकर रिकॉर्ड का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था, जिसमें दो दिन पूर्व सूचित करने का भी उल्लेख था।
फाउंडेशन के निदेशक नियमानुसार 28 सितंबर 2026 को निरीक्षण के लिए संबंधित कार्यालय पहुंचे, लेकिन उस समय न तो राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO) और न ही बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) उपस्थित थे। इस कारण मांगे गए रिकॉर्ड के निरीक्षण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और आवेदक को निरीक्षण से वंचित रहना पड़ा।
इस घटना के बाद, फाउंडेशन की ओर से विभाग को एक प्रत्युत्तर भेजा गया है। इसमें RTI अधिनियम की धारा 2(j) का उल्लेख करते हुए मूल आवेदन में मांगी गई सूचना एवं संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सूचना उपलब्ध कराने में कोई वैधानिक बाधा है, तो उसका लिखित कारण बताया जाए और यदि कोई शुल्क देय है तो उसकी जानकारी भी प्रदान की जाए।
फाउंडेशन ने यह भी आग्रह किया है कि यदि रिकॉर्ड का निरीक्षण आवश्यक समझा जाता है, तो SPIO अथवा अधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में निरीक्षण के लिए एक निश्चित तारीख और समय निर्धारित कर उन्हें सूचित किया जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आवेदक को कब तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
फाउंडेशन के निदेशक नियमानुसार 28 सितंबर 2026 को निरीक्षण के लिए संबंधित कार्यालय पहुंचे, लेकिन उस समय न तो राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO) और न ही बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) उपस्थित थे। इस कारण मांगे गए रिकॉर्ड के निरीक्षण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और आवेदक को निरीक्षण से वंचित रहना पड़ा।
इस घटना के बाद, फाउंडेशन की ओर से विभाग को एक प्रत्युत्तर भेजा गया है। इसमें RTI अधिनियम की धारा 2(j) का उल्लेख करते हुए मूल आवेदन में मांगी गई सूचना एवं संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सूचना उपलब्ध कराने में कोई वैधानिक बाधा है, तो उसका लिखित कारण बताया जाए और यदि कोई शुल्क देय है तो उसकी जानकारी भी प्रदान की जाए।
फाउंडेशन ने यह भी आग्रह किया है कि यदि रिकॉर्ड का निरीक्षण आवश्यक समझा जाता है, तो SPIO अथवा अधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में निरीक्षण के लिए एक निश्चित तारीख और समय निर्धारित कर उन्हें सूचित किया जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आवेदक को कब तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।