📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vishal Dutta
राजनीति
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का ‘विश्वगुरु’ संदेश बनाता है सेवा विचार पर राजनीतिक टकराव
✍️ Business Today
🗓 02 सित. 2026, 05:13 AM
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मोहन भागवत के ‘विश्वगुरु’ के आह्वान पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध किया, कहा यह राष्ट्र के लोकतांत्रिक सेवा सिद्धांतों के विपरीत है।
हाल ही में आयोजित एक आरएसएस सभा में प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनने का आह्वान किया, जिसमें देश की सेवा और नैतिक मूल्यों के माध्यम से विश्व को मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी पर बल दिया गया।
विपक्षी नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नारा एक राजनीतिक उपकरण बन रहा है, जो एक समावेशी और निरपेक्ष सेवा विचार को धुंधला कर सकता है, तथा असहमति को दबाने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव भारत की सांस्कृतिक कथा को नीति विमर्श में कैसे प्रस्तुत किया जाए, इस बड़े सवाल को उजागर करता है; जहाँ शासक वर्ग अधिक आत्मविश्वासी वैश्विक पहचान की तलाश में है, वहीं आलोचक सांस्कृतिक गर्व को शासन से अलग रखने की चेतावनी दे रहे हैं।
भाषण के बाद कोई तत्काल विधायी या नीति परिवर्तन नहीं बताया गया, और यह बहस संसद व सार्वजनिक मंचों में जारी रहने की संभावना है।
विपक्षी नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नारा एक राजनीतिक उपकरण बन रहा है, जो एक समावेशी और निरपेक्ष सेवा विचार को धुंधला कर सकता है, तथा असहमति को दबाने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव भारत की सांस्कृतिक कथा को नीति विमर्श में कैसे प्रस्तुत किया जाए, इस बड़े सवाल को उजागर करता है; जहाँ शासक वर्ग अधिक आत्मविश्वासी वैश्विक पहचान की तलाश में है, वहीं आलोचक सांस्कृतिक गर्व को शासन से अलग रखने की चेतावनी दे रहे हैं।
भाषण के बाद कोई तत्काल विधायी या नीति परिवर्तन नहीं बताया गया, और यह बहस संसद व सार्वजनिक मंचों में जारी रहने की संभावना है।