📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vishal Dutta
राजनीति
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आचार्य पुलकसागर से मुलाकात के बाद यूजीसी मसौदा नियमों को कानून नहीं बतलाया
✍️ Amar Ujala · Bhilwara
🗓 16 सित. 2026, 09:36 PM
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आचार्य पुलकसागर ने कहा कि यूजीसी के प्रस्तावित नियम अभी केवल मसौदा हैं, यह बात उन्होंने राजस्थान में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात के दौरान सुनी।
आचार्य पुलकसागर महाराज, जो एक प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्व हैं, ने राजस्थान में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की और बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नियम अभी केवल मसौदा रूप में हैं। पुलकसागर के अनुसार, भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन नियमों को कानून के रूप में लागू नहीं किया जाएगा।
यह बातचीत भिलवाड़ा में हुई, जहाँ दोनों नेताओं ने यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों को लेकर चिंताओं पर चर्चा की। जबकि यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नई नियमावली तैयार कर रहा है, इस बैठक में इन प्रस्तावों के प्रति राजनीतिक प्रतिरोध को उजागर किया गया।
पुलकसागर ने यह रेखांकित किया कि भागवत के बयान कुछ राजनीतिक वर्गों में इस मसौदे की व्यवहार्यता को लेकर व्यापक संदेह को दर्शाते हैं। अब तक यूजीसी या शिक्षा मंत्रालय की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई है।
यह दावा भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में नियामक सुधारों पर चल रहे बहसों को उजागर करता है, जहाँ हितधारक यह स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं कि मसौदा विधायी प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा या नहीं।
आगे की जानकारी यूजीसी के अंतिम निर्णय और राजनीतिक नेताओं के आगे के बयानों के साथ प्रकाशित की जाएगी।
यह बातचीत भिलवाड़ा में हुई, जहाँ दोनों नेताओं ने यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों को लेकर चिंताओं पर चर्चा की। जबकि यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नई नियमावली तैयार कर रहा है, इस बैठक में इन प्रस्तावों के प्रति राजनीतिक प्रतिरोध को उजागर किया गया।
पुलकसागर ने यह रेखांकित किया कि भागवत के बयान कुछ राजनीतिक वर्गों में इस मसौदे की व्यवहार्यता को लेकर व्यापक संदेह को दर्शाते हैं। अब तक यूजीसी या शिक्षा मंत्रालय की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई है।
यह दावा भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में नियामक सुधारों पर चल रहे बहसों को उजागर करता है, जहाँ हितधारक यह स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं कि मसौदा विधायी प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा या नहीं।
आगे की जानकारी यूजीसी के अंतिम निर्णय और राजनीतिक नेताओं के आगे के बयानों के साथ प्रकाशित की जाएगी।