📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
राजनीति
आरएसएस ने कहा: सभी को है विरोध का अधिकार, देश‑विरोधी ताकतों से रहें सतर्क
✍️ Amar Ujala
🗓 01 नव. 2026, 06:59 AM
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आरएसएस ने कहा कि हर नागरिक को विरोध करने का अधिकार है, परन्तु देश‑विरोधी ताकतों से सतर्क रहने की चेतावनी दी।
राष्ट्रवादी स्वयंसहायक संघ (आरएसएस) ने सभी नागरिकों को विरोध करने का अधिकार लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में मान्य किया। इस संगठन ने कहा कि शांति‑पूर्ण विरोध भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है।
इसी बयान में आरएसएस ने "देश‑विरोधी ताकतों" के बारे में सतर्क रहने की चेतावनी दी, जो विरोधों का दुरुपयोग करके विघटनकारी या वैरभरी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। नागरिकों से अनुरोध किया गया कि वे जागरूक रहें और यह सुनिश्चित करें कि प्रदर्शन राष्ट्रीय एकता को खतरे में न डालें।
आरएसएस ने किसी विशेष समूह या व्यक्ति का उल्लेख नहीं किया, पर यह चेतावनी उसके राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के दीर्घकालिक रुख को दर्शाती है, जबकि वैध लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का समर्थन करता है। हाल ही में विभिन्न सामाजिक‑आर्थिक मुद्दों पर देश भर में हुए कई विरोधों को देखते हुए यह टिप्पणी सामने आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस का यह बयान नागरिक स्वतंत्रताओं के समर्थन और जिम्मेदार सक्रियता की अपील के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, जो संगठन ने सार्वजनिक वार्ता में लगातार दोहराया है।
इसी बयान में आरएसएस ने "देश‑विरोधी ताकतों" के बारे में सतर्क रहने की चेतावनी दी, जो विरोधों का दुरुपयोग करके विघटनकारी या वैरभरी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। नागरिकों से अनुरोध किया गया कि वे जागरूक रहें और यह सुनिश्चित करें कि प्रदर्शन राष्ट्रीय एकता को खतरे में न डालें।
आरएसएस ने किसी विशेष समूह या व्यक्ति का उल्लेख नहीं किया, पर यह चेतावनी उसके राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के दीर्घकालिक रुख को दर्शाती है, जबकि वैध लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का समर्थन करता है। हाल ही में विभिन्न सामाजिक‑आर्थिक मुद्दों पर देश भर में हुए कई विरोधों को देखते हुए यह टिप्पणी सामने आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस का यह बयान नागरिक स्वतंत्रताओं के समर्थन और जिम्मेदार सक्रियता की अपील के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, जो संगठन ने सार्वजनिक वार्ता में लगातार दोहराया है।