📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
स्वास्थ्य
RMSCL ने राजस्थान में कैंसर दवा के ब्लैक मार्केट रिसाव की जांच शुरू
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 20 अग. 2026, 07:35 AM
👁 6
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कमिशन (RMSCL) ने सरकारी कैंसर दवा के ब्लैक मार्केट में पहुँचने के बाद पूरे सप्लाई नेटवर्क की जाँच शुरू की, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा गया है।
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कमिशन (RMSCL) ने सरकारी कैंसर दवाओं के ब्लैक मार्केट में पहुँचने के बाद पूरे सप्लाई नेटवर्क की जाँच शुरू करने की घोषणा की है। जांच में दवा के खरीद से लेकर वितरण तक के सभी चरणों को ट्रैक किया जाएगा, विशेषकर अस्पतालों और संबद्ध मेडिकल कॉलेजों की रिकॉर्ड‑रखरखाव की जिम्मेदारी पर ध्यान दिया जाएगा।
जांच नोटिस के अनुसार, दवा के सुरक्षित उपयोग और रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी प्राप्त करने वाले अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। इस कारण संबंधित मेडिकल कॉलेज को बुलाकर यह समझाने को कहा गया है कि किस प्रकार की चूक ने दवा को अवैध बाजार में पहुँचाया।
RMSCL राज्य भर के सप्लाई नेटवर्क को मानचित्रित करके कमजोरियों की पहचान करेगा और भविष्य में ऐसे रिसाव को रोकने के लिए कड़े मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल तैयार करेगा। दोषी पाए जाने वाले पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह कदम आवश्यक ऑन्कोलॉजी दवाओं के ब्लैक मार्केट में उपलब्ध होने की बढ़ती चिंता के मद्देनज़र उठाया गया है, जो रोगियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को कमजोर करता है।
अधिकारी अभी तक दवा की सटीक मात्रा का खुलासा नहीं कर रहे हैं, पर उन्होंने कहा है कि जांच पूरी और पारदर्शी होगी, तथा परिणाम स्वास्थ्य विभाग और जनता के साथ साझा किए जाएंगे।
जांच नोटिस के अनुसार, दवा के सुरक्षित उपयोग और रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी प्राप्त करने वाले अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। इस कारण संबंधित मेडिकल कॉलेज को बुलाकर यह समझाने को कहा गया है कि किस प्रकार की चूक ने दवा को अवैध बाजार में पहुँचाया।
RMSCL राज्य भर के सप्लाई नेटवर्क को मानचित्रित करके कमजोरियों की पहचान करेगा और भविष्य में ऐसे रिसाव को रोकने के लिए कड़े मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल तैयार करेगा। दोषी पाए जाने वाले पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह कदम आवश्यक ऑन्कोलॉजी दवाओं के ब्लैक मार्केट में उपलब्ध होने की बढ़ती चिंता के मद्देनज़र उठाया गया है, जो रोगियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को कमजोर करता है।
अधिकारी अभी तक दवा की सटीक मात्रा का खुलासा नहीं कर रहे हैं, पर उन्होंने कहा है कि जांच पूरी और पारदर्शी होगी, तथा परिणाम स्वास्थ्य विभाग और जनता के साथ साझा किए जाएंगे।