📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sapna Sony
मौसम
बढ़ते गंगा जल से संध्या आरती में मंगेर के मां चंडिका मंदिर के गर्भगृह में जल प्रवेश
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 22 अग. 2026, 02:18 PM
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गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण शुक्रवार शाम संध्या आरती के दौरान मंगेर के मां चंडिका मंदिर के गर्भगृह में जल प्रवेश कर गया।
गंगा नदी का जलस्तर शुक्रवार को लगातार बढ़ता रहा, जिससे बिहार के मंगेर जिले में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई। प्रसिद्ध शाक्तिपीठ मां चंडिका मंदिर में निर्धारित संध्या आरती के दौरान नदी का जल मंदिर की बाहरी सुरक्षा को पार कर गर्भगृह में प्रवेश कर गया, जहाँ मुख्य देवता स्थित है।
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आरती शुरू होते ही जल गर्भगृह तक पहुँच गया, जिससे पुजारी ने पूजा रोक दी और उपस्थित श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। स्थानीय अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने और आपातकालीन उपायों के समन्वय के लिए भेजा गया।
जिला प्रशासन ने पुष्टि की कि बढ़ते जल स्तर ने मंगेर के कई निचले क्षेत्रों को बाढ़ के जोखिम में डाल दिया है और वे स्थिति को करीबी तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और किसी भी निकासी निर्देश का पालन करने को कहा।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि गर्भगृह की संगमरमर की फर्श और देवता की मूर्ति पर जल का असर पड़ा है, लेकिन कोई संरचनात्मक क्षति नहीं देखी गई। जल स्तर घटने के बाद ही पुनर्स्थापना कार्य शुरू किया जाएगा।
यह घटना बिहार में धरोहर स्थलों की बढ़ती जलवायु‑संबंधी जोखिम को उजागर करती है, जिसे विशेषज्ञ बदलते मौसम पैटर्न के कारण और अधिक गंभीर मानते हैं।
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आरती शुरू होते ही जल गर्भगृह तक पहुँच गया, जिससे पुजारी ने पूजा रोक दी और उपस्थित श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। स्थानीय अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने और आपातकालीन उपायों के समन्वय के लिए भेजा गया।
जिला प्रशासन ने पुष्टि की कि बढ़ते जल स्तर ने मंगेर के कई निचले क्षेत्रों को बाढ़ के जोखिम में डाल दिया है और वे स्थिति को करीबी तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और किसी भी निकासी निर्देश का पालन करने को कहा।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि गर्भगृह की संगमरमर की फर्श और देवता की मूर्ति पर जल का असर पड़ा है, लेकिन कोई संरचनात्मक क्षति नहीं देखी गई। जल स्तर घटने के बाद ही पुनर्स्थापना कार्य शुरू किया जाएगा।
यह घटना बिहार में धरोहर स्थलों की बढ़ती जलवायु‑संबंधी जोखिम को उजागर करती है, जिसे विशेषज्ञ बदलते मौसम पैटर्न के कारण और अधिक गंभीर मानते हैं।