📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sridhar Elangovan
स्थानीय
रिटायर MP हाईकोर्ट जस्टिस अवनींद्र सिंह ने 1.01 करोड़ रुपये पीएम‑केयर्स फंड को दान किए
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 18 सित. 2026, 12:36 PM
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रिटायरमेंट के दिन MP हाईकोर्ट जस्टिस अवनींद्र सिंह ने अपने जीपीएफ से 1.01 करोड़ रुपये पीएम‑केयर्स फंड को दान करने की घोषणा की और जबलपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान पंजीकरण करवाया।
जबलपुर – मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के अंत में एक सामाजिक पहल की घोषणा की। रिटायरमेंट के दिन उन्होंने अपने सरकारी प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) की राशि में से 1.01 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड को दान करने का इरादा बताया, जो आपातकालीन राहत और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए स्थापित किया गया है।
जस्टिस सिंह का यह कदम वरिष्ठ सार्वजनिक कर्मचारियों के बीच निजी बचत को सामाजिक कार्यों में लगाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। जीपीएफ की इस राशि को केयर्स फंड में स्थानांतरित करके वह मौजूदा आपदा एवं स्वास्थ्य राहत कार्यक्रमों को समर्थन देना चाहते हैं, जो देश भर में कई संगठनों और व्यक्तियों के योगदान से चल रहा है।
धनराशि के अलावा, जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान पंजीकरण भी करवा लिया। इस पंजीकरण के माध्यम से भविष्य में उनके अंग व ऊतक चिकित्सा अनुसंधान और प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिससे सामाजिक कल्याण में उनका योगदान जीवन के बाद भी जारी रहेगा।
स्थानीय अधिकारियों और नागरिक समाज के समूहों ने इस पहल की सराहना की, यह कहा कि यह न्यायिक समुदाय और आम जनता के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित करता है। जबकि कोर्ट से आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिली, इस रिटायरमेंट घोषणा को क्षेत्रीय मीडिया में व्यापक रूप से कवरेज मिला है, जिसमें उनके वित्तीय दान और देहदान पंजीकरण दोनों को उजागर किया गया है।
जस्टिस सिंह का यह कदम वरिष्ठ सार्वजनिक कर्मचारियों के बीच निजी बचत को सामाजिक कार्यों में लगाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। जीपीएफ की इस राशि को केयर्स फंड में स्थानांतरित करके वह मौजूदा आपदा एवं स्वास्थ्य राहत कार्यक्रमों को समर्थन देना चाहते हैं, जो देश भर में कई संगठनों और व्यक्तियों के योगदान से चल रहा है।
धनराशि के अलावा, जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान पंजीकरण भी करवा लिया। इस पंजीकरण के माध्यम से भविष्य में उनके अंग व ऊतक चिकित्सा अनुसंधान और प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिससे सामाजिक कल्याण में उनका योगदान जीवन के बाद भी जारी रहेगा।
स्थानीय अधिकारियों और नागरिक समाज के समूहों ने इस पहल की सराहना की, यह कहा कि यह न्यायिक समुदाय और आम जनता के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित करता है। जबकि कोर्ट से आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिली, इस रिटायरमेंट घोषणा को क्षेत्रीय मीडिया में व्यापक रूप से कवरेज मिला है, जिसमें उनके वित्तीय दान और देहदान पंजीकरण दोनों को उजागर किया गया है।