📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
राजनीति
आरक्षण लॉटरी ने बदला बांसवाड़ा नगर परिषद का समीकरण, पहली बार एसटी वर्ग का सभापति चुना जाएगा
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 25 अग. 2026, 10:47 AM
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आरक्षण लॉटरी ने बांसवाड़ा नगर परिषद की सियासत में बदलाव किया है; पिछले छह चुनावों में कोई पूर्व प्रमुख दोबारा नहीं आया और इस बार एसटी वर्ग का सभापति पहली बार चुना जाएगा।
बांसवाड़ा नगर परिषद में लागू हुई आरक्षण लॉटरी ने स्थानीय सियासत में गहरा बदलाव लाया है। पिछले छह चुनावों में कोई भी पूर्व निकाय प्रमुख दोबारा कुर्सी तक नहीं पहुंच सका, जिससे सत्ता में निरंतर परिवर्तन दिखता है।
इस बार आरक्षण के तहत सभापति पद एसटी वर्ग के उम्मीदवार के लिए निर्धारित किया गया है। यह पहली बार है जब एसटी वर्ग का प्रतिनिधि इस प्रमुख पद के लिए पात्र होगा, जिससे चुनाव की प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कठोर आरक्षण नियम और पूर्व नेताओं की दोबारा जीत न पाने की प्रवृत्ति मिलकर इस चुनाव को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाती है। मतदाता अब इस बात पर ध्यान देंगे कि नया एसटी सभापति स्थानीय समस्याओं को कैसे सुलझाएगा और परिषद की स्थापित गतिशीलता के साथ कैसे तालमेल बिठाएगा।
राजस्थान भर में इस परिणाम को निकटता से देखा जाएगा, क्योंकि यह अन्य जिलों में नगरपालिका शासन पर आरक्षण नीतियों के प्रभाव का एक संभावित मॉडल पेश कर सकता है।
इस बार आरक्षण के तहत सभापति पद एसटी वर्ग के उम्मीदवार के लिए निर्धारित किया गया है। यह पहली बार है जब एसटी वर्ग का प्रतिनिधि इस प्रमुख पद के लिए पात्र होगा, जिससे चुनाव की प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कठोर आरक्षण नियम और पूर्व नेताओं की दोबारा जीत न पाने की प्रवृत्ति मिलकर इस चुनाव को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाती है। मतदाता अब इस बात पर ध्यान देंगे कि नया एसटी सभापति स्थानीय समस्याओं को कैसे सुलझाएगा और परिषद की स्थापित गतिशीलता के साथ कैसे तालमेल बिठाएगा।
राजस्थान भर में इस परिणाम को निकटता से देखा जाएगा, क्योंकि यह अन्य जिलों में नगरपालिका शासन पर आरक्षण नीतियों के प्रभाव का एक संभावित मॉडल पेश कर सकता है।