📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Finance of India
बिज़नेस
आरबीआई गवर्नर का कहना: नई यूपीआई शुल्क से लेन‑देन पर असर नहीं
✍️ Telangana Today
🗓 07 अक्टू. 2026, 03:46 PM
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आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नई यूपीआई शुल्क से लेन‑देन की संख्या में कमी की संभावना नहीं है।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) के कुछ लेन‑देन पर नई शुल्क संरचना लागू की है, जिससे प्लेटफ़ॉर्म के संचालन खर्च को संतुलित किया जा सके। यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने यूपीआई भुगतान पर प्रत्यक्ष शुल्क लगाया है, जबकि इस सेवा का उपयोग दैनिक अरबों लेन‑देन में हो रहा है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि यह नया शुल्क लेन‑देन की कुल मात्रा को कम नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह शुल्क केवल कुछ उच्च‑मूल्य या व्यापारी‑उन्मुख लेन‑देन पर लागू होगा, जबकि अधिकांश व्यक्ति‑से‑व्यक्ति ट्रांसफ़र निःशुल्क रहेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई का आशावाद यूपीआई के व्यापक उपयोगकर्ता आधार और इसकी सुविधा से उत्पन्न होता है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय है। प्रारंभिक बाजार प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि व्यापारी इस लागत को बिना बड़े मूल्य वृद्धि के समायोजित कर रहे हैं, और प्लेटफ़ॉर्म की विकास गति अपेक्षित रूप से बनी रहेगी।
केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में लेन‑देन पैटर्न को बारीकी से देखेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नई शुल्क संरचना छोटे व्यवसायों या कम‑आय वाले उपयोगकर्ताओं के लिए कोई बाधा न बन जाए।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि यह नया शुल्क लेन‑देन की कुल मात्रा को कम नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह शुल्क केवल कुछ उच्च‑मूल्य या व्यापारी‑उन्मुख लेन‑देन पर लागू होगा, जबकि अधिकांश व्यक्ति‑से‑व्यक्ति ट्रांसफ़र निःशुल्क रहेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई का आशावाद यूपीआई के व्यापक उपयोगकर्ता आधार और इसकी सुविधा से उत्पन्न होता है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय है। प्रारंभिक बाजार प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि व्यापारी इस लागत को बिना बड़े मूल्य वृद्धि के समायोजित कर रहे हैं, और प्लेटफ़ॉर्म की विकास गति अपेक्षित रूप से बनी रहेगी।
केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में लेन‑देन पैटर्न को बारीकी से देखेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नई शुल्क संरचना छोटे व्यवसायों या कम‑आय वाले उपयोगकर्ताओं के लिए कोई बाधा न बन जाए।