📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Singer Ravindra Singh
राजनीति
रविंद्र सिंह भाटी ने जयपुर में ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्रों की राष्ट्रीय मान्यता की माँग की
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 22 सित. 2026, 01:15 PM
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जयपुर में सांसद रविंद्र सिंह भाटी ने केंद्र को राज्य‑जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्रों को राष्ट्रीय मान्यता देने और भूमि‑संबंधी मानदंडों की समीक्षा करने का आग्रह किया।
सांसद रविंद्र सिंह भाटी ने जयपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए राज्य‑स्तर पर जारी किए गए ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण‑पत्रों को केंद्र में मान्यता देने की मांग की। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षित सीटों तक पहुँच आसान होगी।
भाटी ने तीन मुख्य सुधारों पर ज़ोर दिया: प्रथम, सभी केंद्रीय सेवाओं में राज्य‑जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्रों को स्वीकार करना; द्वितीय, प्रमाण‑पत्र की वैधता अवधि बढ़ाकर प्रशासनिक बोझ कम करना; तथा तृतीय, पात्रता निर्धारित करने वाले भूमि‑संबंधी मानदंडों की पुनः समीक्षा करना।
यह मांग 2019 में लागू किए गए ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कार्यान्वयन में जारी चुनौतियों के मद्देनज़र उठाई गई है, जहाँ कई लाभार्थियों को राज्य और केंद्र के सत्यापन प्रक्रियाओं में अंतर का सामना करना पड़ता है। समान दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर विभिन्न राज्यों में दबाव बना हुआ है।
भाटी ने बताया कि यह मुद्दा केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में समान समस्याएँ देखी जा रही हैं, और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से इस असंगतियों को दूर करने के लिए एक कार्यसमूह बनाने का आग्रह किया है।
भाटी ने तीन मुख्य सुधारों पर ज़ोर दिया: प्रथम, सभी केंद्रीय सेवाओं में राज्य‑जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्रों को स्वीकार करना; द्वितीय, प्रमाण‑पत्र की वैधता अवधि बढ़ाकर प्रशासनिक बोझ कम करना; तथा तृतीय, पात्रता निर्धारित करने वाले भूमि‑संबंधी मानदंडों की पुनः समीक्षा करना।
यह मांग 2019 में लागू किए गए ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कार्यान्वयन में जारी चुनौतियों के मद्देनज़र उठाई गई है, जहाँ कई लाभार्थियों को राज्य और केंद्र के सत्यापन प्रक्रियाओं में अंतर का सामना करना पड़ता है। समान दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर विभिन्न राज्यों में दबाव बना हुआ है।
भाटी ने बताया कि यह मुद्दा केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में समान समस्याएँ देखी जा रही हैं, और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से इस असंगतियों को दूर करने के लिए एक कार्यसमूह बनाने का आग्रह किया है।